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कोर्ट के आदेश पर सास को घर में प्रवेश, बहू का क्षेत्र सीमित

कोर्ट के आदेश पर सास को घर में प्रवेश, बहू का क्षेत्र सीमित

जिले में लंबे समय से चल रहे पारिवारिक विवाद के बीच कोर्ट ने सास सत्यवती को उनके घर में प्रवेश दिलाया, जबकि बहू कृष्णा को केवल एक कमरे तक रहने की अनुमति दी गई। यह आदेश सिटी मजिस्ट्रेट और पुलिस की मौजूदगी में लागू किया गया, जिससे मकान खाली कराकर सास को उनका घर वापस दिलाया गया।

यह मामला सत्यवती और कृष्णा के बीच वर्षों से चल रहे विवाद से जुड़ा है। सूत्रों के अनुसार, विवाद तब शुरू हुआ जब परिवार का बेटा कुछ समय के लिए गायब हो गया। गायब होने के बाद बहू ने सास को घर से बाहर निकाल दिया। इसके बाद दोनों पक्षों ने कोर्ट का रुख किया और मामला लंबित रहा।

सिटी मजिस्ट्रेट के अनुसार, कोर्ट ने परिवारिक मामला और दोनों पक्षों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह आदेश दिया। सास को घर में प्रवेश देने के साथ ही बहू के रहने की जगह सीमित कर दी गई ताकि विवाद और हिंसा की संभावना कम हो सके। मजिस्ट्रेट और पुलिस ने मकान का निरीक्षण किया और आदेश के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की।

स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मकान खाली कराकर सास को प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया पूरी सुरक्षा उपायों के तहत की गई। पुलिस ने कहा कि किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए दोनों पक्षों के बीच उचित दूरी और निगरानी सुनिश्चित की गई।

विधिक विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में कोर्ट का उद्देश्य दोनों पक्षों के अधिकारों और सुरक्षा को सुनिश्चित करना होता है। उन्होंने बताया कि परिवारिक विवाद में अक्सर भावनात्मक तनाव बढ़ जाता है, और कोर्ट के आदेश से इसे नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

स्थानीय लोग और पड़ोसी इस आदेश को सकारात्मक कदम मान रहे हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से चले आ रहे विवाद के बाद अब मामला शांतिपूर्ण ढंग से सुलझने की दिशा में कदम बढ़ा है। वहीं, दोनों पक्षों से अपील की गई है कि वे कोर्ट के आदेश का पालन करें और विवाद को व्यक्तिगत स्तर पर बढ़ावा न दें।

इस आदेश से यह भी संदेश गया है कि परिवारिक मामलों में कानून और न्याय व्यवस्था का पालन अनिवार्य है। किसी भी प्रकार की हिंसा, दबाव या अवैध कार्रवाई को कानून मान्य नहीं करता और ऐसे मामलों में कोर्ट हस्तक्षेप कर उचित आदेश देता है।

कोर्ट और पुलिस की निगरानी में इस आदेश को लागू करने से इलाके में अन्य परिवारों के लिए भी उदाहरण स्थापित हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि पारिवारिक विवादों में कानून का समय पर हस्तक्षेप दोनों पक्षों के लिए सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करता है।

फिरोजाबाद जिले में यह मामला यह दर्शाता है कि परिवारिक विवाद के समाधान में न्यायिक प्रक्रिया कितनी अहम भूमिका निभाती है। कानून के निर्देशों का पालन करने से न केवल विवाद सुलझता है, बल्कि भविष्य में किसी अप्रिय घटना की संभावना भी कम हो जाती है।

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