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मंत्री संजय निषाद ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से की मुलाकात, बुके देकर बोले- शिष्टाचार भेंट

मंत्री संजय निषाद ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से की मुलाकात, बुके देकर बोले- शिष्टाचार भेंट

उत्तर प्रदेश की राजनीति में सोमवार को एक मुलाकात चर्चा का विषय बन गई। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात की। मंत्री निषाद लखनऊ स्थित माता प्रसाद पांडेय के आवास पर पहुंचे और उन्हें बुके भेंट किया। मुलाकात की तस्वीरें उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा कीं। पोस्ट के साथ उन्होंने इसे ‘शिष्टाचार भेंट’ बताया।

मंत्री संजय निषाद की इस मुलाकात के सामने आने के बाद यूपी की सियासत में इसके अलग-अलग मायने निकाले जाने लगे हैं। हालांकि मंत्री की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह मुलाकात शिष्टाचार के तहत हुई है। सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा होने के बाद राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।

मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच किन मुद्दों पर बातचीत हुई, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। संजय निषाद की ओर से सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों में वह माता प्रसाद पांडेय को बुके देते हुए नजर आ रहे हैं। पोस्ट के कैप्शन में उन्होंने इसे शिष्टाचार भेंट बताया है। इससे संकेत मिलता है कि मुलाकात को फिलहाल राजनीतिक बैठक के बजाय औपचारिक मुलाकात के तौर पर पेश किया गया है।

माता प्रसाद पांडेय उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। वहीं संजय निषाद प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और निषाद समुदाय से जुड़े राजनीतिक मुद्दों को लेकर सक्रिय रहते हैं। दोनों नेताओं की अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि होने के कारण इस मुलाकात ने राजनीतिक चर्चा को जन्म दिया है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच होने वाली मुलाकातें अक्सर चर्चा में रहती हैं। हालांकि कई बार ऐसी मुलाकातें पूरी तरह औपचारिक और व्यक्तिगत स्तर की होती हैं। इस मामले में भी संजय निषाद ने खुद इसे शिष्टाचार भेंट बताया है। इसलिए केवल मुलाकात के आधार पर किसी राजनीतिक बदलाव या नए समीकरण का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर तस्वीरें सामने आने के साथ ही समर्थकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच भी चर्चा शुरू हो गई। लोग अपने-अपने तरीके से इस मुलाकात के मायने निकाल रहे हैं। हालांकि दोनों नेताओं की ओर से किसी राजनीतिक मुद्दे, गठबंधन या रणनीतिक चर्चा को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

फिलहाल मंत्री संजय निषाद की ओर से इसे शिष्टाचार भेंट ही बताया गया है। ऐसे में इस मुलाकात का वास्तविक राजनीतिक महत्व आने वाले दिनों में ही स्पष्ट हो सकेगा। विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक मुद्दों को लेकर अक्सर तीखी बयानबाजी देखने को मिलती है। ऐसे माहौल में दोनों पक्षों के प्रमुख नेताओं की इस तरह की सौहार्दपूर्ण मुलाकात निश्चित तौर पर चर्चा का विषय बन जाती है।

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