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मेरठ में जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही पर सख्ती, 9 अफसरों का वेतन कटा, 155 को नोटिस

मेरठ में जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही पर सख्ती, 9 अफसरों का वेतन कटा, 155 को नोटिस

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही को लेकर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी (DM) ने कार्रवाई करते हुए 9 अधिकारियों और अभियंताओं का एक दिन का वेतन काटने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही 155 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

प्रशासनिक स्तर पर यह कदम उस समय उठाया गया जब समीक्षा बैठक में जनशिकायतों के समाधान की प्रगति संतोषजनक नहीं पाई गई। जिलाधिकारी ने पाया कि कई विभागों में शिकायतों का निस्तारण समय पर नहीं किया गया और कई मामले लंबे समय से लंबित थे।

अधिकारियों के अनुसार, जनसुनवाई और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्राप्त शिकायतों के निस्तारण में ढिलाई को गंभीरता से लिया गया है। इस लापरवाही के कारण आम जनता को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था, जिसे प्रशासन ने अस्वीकार्य माना है।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जनशिकायतों का समाधान समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से किया जाए। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं का निपटारा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कार्रवाई के तहत जिन 9 अफसरों और अभियंताओं का एक दिन का वेतन काटा गया है, उन्हें चेतावनी भी दी गई है कि भविष्य में सुधार न होने पर और सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, 155 अधिकारियों को जारी कारण बताओ नोटिस में उनसे जवाब मांगा गया है कि उनके स्तर पर शिकायतों के निस्तारण में देरी क्यों हुई।

Government of Uttar Pradesh द्वारा संचालित जनसुनवाई प्रणाली के तहत हर स्तर पर शिकायतों के त्वरित समाधान पर जोर दिया जा रहा है। इसके बावजूद कई जिलों में लापरवाही की शिकायतें सामने आती रही हैं, जिस पर अब प्रशासन सख्त नजर बनाए हुए है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जनशिकायत निवारण प्रणाली प्रशासन और जनता के बीच विश्वास का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। यदि इसमें देरी या लापरवाही होती है, तो इससे सरकारी योजनाओं और सेवाओं की छवि पर भी असर पड़ता है।

इस कार्रवाई के बाद जिला प्रशासन ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे लंबित शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण करें और नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

स्थानीय लोगों ने इस कदम का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इस तरह की सख्ती से सरकारी कामकाज में सुधार आएगा और शिकायतों का समय पर समाधान सुनिश्चित होगा।

फिलहाल, प्रशासन की ओर से यह संकेत दिया गया है कि भविष्य में भी यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो और कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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