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मेरठ SSP अविनाथ पांडेय पांच महीने में हटे: थप्पड़ कांड से चर्चा में आए थे, जाते-जाते नए विवाद ने बढ़ाई हलचल

मेरठ SSP अविनाथ पांडेय पांच महीने में हटे: थप्पड़ कांड से चर्चा में आए थे, जाते-जाते नए विवाद ने बढ़ाई हलचल

मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाथ पांडेय को पद संभालने के करीब पांच महीने बाद ही हटा दिया गया है। थप्पड़ कांड को लेकर चर्चा में आए अविनाथ पांडेय का कार्यकाल एक बार फिर विवादों में रहा। बताया जा रहा है कि उनके कार्यकाल के अंतिम दौर में सामने आए एक नए विवाद की शिकायत लखनऊ तक पहुंचने के बाद शासन स्तर पर उन्हें हटाने का फैसला लिया गया।

अविनाथ पांडेय ने मेरठ में पुलिस कप्तान की जिम्मेदारी संभालने के बाद कानून व्यवस्था को लेकर कई स्तरों पर कार्रवाई की। हालांकि इसी दौरान एक घटना ने उन्हें प्रदेशभर में चर्चा में ला दिया था। थप्पड़ कांड के बाद उनके काम करने के तरीके और पुलिसिंग को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं सामने आई थीं।

अब उनके तबादले के साथ एक नया विवाद भी जुड़ गया है। बताया जा रहा है कि मेरठ में सामने आए इस विवाद की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों और शासन तक पहुंची थी। इसके बाद पूरे मामले को गंभीरता से लिया गया और कुछ ही समय में अविनाथ पांडेय को मेरठ SSP के पद से हटा दिया गया।

हालांकि नए विवाद को लेकर आधिकारिक तौर पर सभी तथ्य अभी सामने नहीं आए हैं। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि विवाद की पूरी पृष्ठभूमि क्या थी और इसमें किन परिस्थितियों को आधार बनाकर कार्रवाई की गई। पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर मामले से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है।

अविनाथ पांडेय का मेरठ में कार्यकाल करीब पांच महीने का रहा। इतने कम समय में उनके हटाए जाने को लेकर पुलिस महकमे में भी चर्चा है। खास तौर पर थप्पड़ कांड के बाद एक बार फिर विवाद सामने आने से उनके तबादले को लेकर कई तरह की बातें कही जा रही हैं।

सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि विवाद से संबंधित जानकारी लखनऊ तक पहुंची थी। इसके बाद शासन स्तर पर निर्णय लिया गया। हालांकि किसी भी अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी।

फिलहाल अविनाथ पांडेय को मेरठ SSP की जिम्मेदारी से हटा दिया गया है। उनके स्थान पर किस अधिकारी को जिम्मेदारी दी जाएगी, इसे लेकर प्रशासनिक स्तर पर फैसला किया जा रहा है।

अविनाथ पांडेय का तबादला ऐसे समय हुआ है जब मेरठ में कानून व्यवस्था और पुलिसिंग को लेकर लगातार नजर बनी हुई है। उनके कार्यकाल से जुड़े पुराने और नए विवादों के कारण यह प्रशासनिक बदलाव चर्चा का विषय बन गया है। अब पूरे मामले में आगे की कार्रवाई और आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है।

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