मेरठ में दलित युवती अपहरण कांड ने पकड़ा तूल, फुटेज में जानें 24 घंटे बाद भी सुराग नहीं, शव के अंतिम संस्कार से इनकार
मेरठ में मां की हत्या कर दलित युवती के अपहरण का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। घटना के 24 घंटे से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद पुलिस अब तक अगवा की गई युवती का कोई सुराग नहीं लगा पाई है। इस घटना से आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। परिजनों ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक आरोपी की गिरफ्तारी और युवती की सकुशल बरामदगी नहीं हो जाती, तब तक वे मृतका के शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
यह सनसनीखेज वारदात गुरुवार को मेरठ के कपसाड़ गांव में हुई थी। आरोप है कि पारस राजपूत नामक युवक ने पहले युवती की मां की हत्या की और फिर दलित युवती का अपहरण कर फरार हो गया। घटना के बाद से गांव में तनाव का माहौल है और पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
शुक्रवार को मामले ने उस समय और राजनीतिक रंग ले लिया, जब समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान पीड़ित परिवार से मिलने कपसाड़ गांव पहुंचे। हालांकि पुलिस ने उन्हें गांव में प्रवेश करने से रोक दिया। पुलिस और विधायक समर्थकों के बीच इस दौरान धक्का-मुक्की भी हुई। गांव में प्रवेश नहीं मिलने के बाद सपा विधायक अतुल प्रधान गांव के बाहर ही धरने पर बैठ गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
विधायक अतुल प्रधान ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि दलित परिवार के साथ अत्याचार हुआ है और अब तक न तो आरोपी गिरफ्तार हुआ है और न ही युवती का कोई पता चला है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
वहीं, परिजनों का कहना है कि उन्हें पुलिस की कार्रवाई पर भरोसा नहीं रहा है। उनका आरोप है कि घटना के बाद पुलिस ने लापरवाही बरती, जिसका नतीजा यह है कि आरोपी अब तक फरार है। परिजन और ग्रामीण लगातार आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी और युवती की सुरक्षित वापसी की मांग कर रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि युवती की तलाश के लिए कई टीमें गठित की गई हैं और संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। साथ ही आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। गांव और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने न पाए।
मेरठ का यह मामला अब कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती युवती की सुरक्षित बरामदगी और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, वैसे-वैसे प्रशासन पर दबाव भी बढ़ता जा रहा है।

