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मायावती ने सतीश चंद्र मिश्रा को दी नई जिम्मेदारी, चुनाव आयोग से जुड़े काम भी संभालेंगे

मायावती ने सतीश चंद्र मिश्रा को दी नई जिम्मेदारी, चुनाव आयोग से जुड़े काम भी संभालेंगे

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा की जिम्मेदारी बढ़ा दी है। मायावती ने उन्हें कानूनी और मीडिया से जुड़े कार्यों के साथ अब चुनाव आयोग से संबंधित महत्वपूर्ण कामकाज की जिम्मेदारी भी सौंपी है। पार्टी के इस फैसले को आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

मायावती ने बुधवार को पार्टी की चुनावी तैयारियों को लेकर जानकारी साझा करते हुए कहा कि बसपा सर्वसमाज में अपना जनाधार मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। पार्टी की ओर से विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन और उनके नामों की घोषणा की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। मायावती ने दावा किया कि बसपा की बढ़ती सक्रियता से विरोधी दलों में बेचैनी है।

सतीश चंद्र मिश्रा बसपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और पार्टी के कानूनी मामलों में लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। अब चुनाव आयोग से जुड़े काम की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिलने के बाद चुनावी प्रक्रिया से संबंधित मामलों में भी उनकी भूमिका बढ़ जाएगी। पार्टी के लिए उम्मीदवारों के नामांकन, चुनावी नियमों और आयोग से जुड़े कानूनी एवं प्रशासनिक मामलों में उनका अनुभव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ब्राह्मण वोटों पर भी नजर

मायावती के इस फैसले को बसपा की सामाजिक इंजीनियरिंग की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में ब्राह्मण समाज समेत सर्वसमाज के विभिन्न वर्गों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। मायावती ने कहा कि बसपा ने 2007 की तरह सर्वसमाज को साथ लेकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।

2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बसपा को पूर्ण बहुमत मिला था और मायावती मुख्यमंत्री बनी थीं। उस समय पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग रणनीति में दलित और ब्राह्मण मतदाताओं को एक साथ जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया था। अब 2027 के चुनाव से पहले पार्टी उसी तरह के सामाजिक समीकरण को दोबारा मजबूत करने की कोशिश करती दिखाई दे रही है।

मिश्रा की भूमिका क्यों अहम

सतीश चंद्र मिश्रा लंबे समय से मायावती के करीबी और भरोसेमंद नेताओं में माने जाते हैं। वह पेशे से वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और पार्टी के कानूनी मामलों में सक्रिय रहे हैं। अब चुनाव आयोग से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी मिलने से वह चुनावी तैयारियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

बसपा के सामने 2027 में अपना राजनीतिक जनाधार बढ़ाने की चुनौती है। ऐसे में मायावती का संगठन में अनुभवी नेताओं की जिम्मेदारियां बढ़ाना चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी की कोशिश उम्मीदवारों के चयन से लेकर चुनाव आयोग से जुड़े मामलों तक तैयारी को पहले से मजबूत करने की है।

मायावती के इस फैसले से साफ संकेत मिल रहा है कि बसपा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को गति देना शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में पार्टी उम्मीदवारों और संगठन को लेकर और भी बड़े फैसले कर सकती है।

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