बसपा में बड़ा एक्शन: मायावती ने अशोक सिद्धार्थ और रणधीर सिंह बेनीवाल को पार्टी से निकाला, वापसी के सभी रास्ते बंद
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में एक बार फिर बड़ा संगठनात्मक फेरबदल देखने को मिला है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। इसके साथ ही वरिष्ठ नेता रणधीर सिंह बेनीवाल को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।
रविवार को मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अशोक सिद्धार्थ को कई बार चेतावनी दी गई, लेकिन उनके व्यवहार में कोई सुधार नहीं आया। उन्होंने दो टूक कहा कि अब उन्हें भविष्य में किसी भी परिस्थिति में पार्टी में दोबारा शामिल नहीं किया जाएगा।
बार-बार चेतावनी के बाद हुई कार्रवाई
मायावती ने कहा कि पार्टी अनुशासन से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उनके मुताबिक, अशोक सिद्धार्थ को कई अवसर दिए गए, लेकिन वह संगठन की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे। इसी वजह से उन्हें स्थायी रूप से पार्टी से बाहर करने का निर्णय लिया गया।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह फैसला लंबे समय से चल रहे संगठनात्मक असंतोष और अनुशासनहीनता के आरोपों के बाद लिया गया है।
डेढ़ साल में दूसरी बार पार्टी से निष्कासन
यह पहला मौका नहीं है जब अशोक सिद्धार्थ पर बसपा ने कार्रवाई की है। इससे पहले 12 फरवरी 2025 को भी उन्हें गुटबाजी के आरोप में पार्टी से निष्कासित किया गया था। हालांकि, करीब छह महीने बाद सितंबर 2025 में उन्हें दोबारा पार्टी में शामिल कर लिया गया था।
इस बार मायावती ने साफ कर दिया है कि अशोक सिद्धार्थ की वापसी की कोई संभावना नहीं है। उनके इस बयान को बसपा के भीतर अनुशासन को लेकर सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
शनिवार को छीनी गई थी राज्यों की जिम्मेदारी
अशोक सिद्धार्थ के पास तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, गुजरात, छत्तीसगढ़ और दिल्ली में बसपा के संगठनात्मक कार्यों की जिम्मेदारी थी। लेकिन शनिवार को ही मायावती ने उनसे इन सभी राज्यों का प्रभार वापस ले लिया था।
इसके बाद राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर अटकलें लगाई जा रही थीं कि उन्हें उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। हालांकि, अगले ही दिन उन्हें पार्टी से निष्कासित कर इन सभी चर्चाओं पर विराम लग गया।
रणधीर सिंह बेनीवाल पर भी गिरी गाज
मायावती ने संगठनात्मक कार्रवाई करते हुए रणधीर सिंह बेनीवाल को भी पार्टी से बाहर कर दिया। बेनीवाल बसपा में राष्ट्रीय समन्वयक (कोऑर्डिनेटर) की भूमिका निभा रहे थे और उनके पास पंजाब, हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर जैसे महत्वपूर्ण राज्यों की जिम्मेदारी थी।
हालांकि, पार्टी की ओर से उनके निष्कासन के पीछे विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन इसे संगठन में अनुशासन और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
संगठन में सख्ती का संदेश
लगातार दूसरी बार अशोक सिद्धार्थ पर हुई कार्रवाई और वरिष्ठ नेताओं को हटाने के फैसले से साफ संकेत मिलता है कि मायावती आगामी चुनावों से पहले संगठन को नए सिरे से मजबूत करने और अनुशासनहीनता पर सख्त रुख अपनाने के मूड में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला बसपा के अंदर नेतृत्व की पकड़ मजबूत करने और संगठनात्मक ढांचे को पुनर्गठित करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

