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काशी के मणिकर्णिका घाट पर मसाने की होली, वीडियो में देंखे भस्म और श्रद्धा का अनोखा संगम

काशी के मणिकर्णिका घाट पर मसाने की होली, वीडियो में देंखे भस्म और श्रद्धा का अनोखा संगम

जलती चिताएं, रोते-बिलखते लोग और चिता की राख से होली खेलते साधु-संन्यासी—यह नजारा इस समय मणिकर्णिका घाट पर देखने को मिल रहा है। शनिवार को यहाँ प्रतिवर्ष की भांति मसाने की होली का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भीड़ उमड़ी। इस अनोखे पर्व में भस्म, रंग और आस्था का अनोखा संगम देखने को मिलता है।

समाचार के अनुसार, मसाने की होली का रंगोत्सव शनिवार को डमरू वादन के साथ शुरू हुआ। घाट पर साधु-संन्यासी जुटे और मसान नाथ की पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने भस्म, गुलाल और अबीर को बाबा मसान नाथ को अर्पित किया। पूजा के बाद भस्म की होली खेली गई, जिसमें साधु और श्रद्धालु चिता की राख में सराबोर होकर होली के रंगों में झूमते नजर आए।

घाट पर जश्न के बीच से शवयात्राएं भी लगातार गुजरती रहीं, जिससे यह दृश्य और अधिक धार्मिक और रहस्यमय प्रतीत हुआ। कोई साधु गले में नरमुंडों की माला डाले नजर आया, तो कोई डमरू की थाप पर नृत्य करता दिखा। इस अनोखी परंपरा में भस्म को शुभ और पवित्र माना जाता है, और इसे खेलते समय श्रद्धालु अपने जीवन और मृत्यु के चक्र के प्रति ध्यान केंद्रित करते हैं।

मसाने की होली में इस वर्ष तीन लाख से अधिक श्रद्धालु और पर्यटक काशी पहुँचे हैं। विदेशी पर्यटक भी इस अनोखे उत्सव का अनुभव लेने के लिए घाट पहुंचे और रंग, भस्म और आस्था में सराबोर होकर झूमते नजर आए। आमतौर पर जिस चिता की राख से लोग दूरी बनाते हैं, आज वही राख श्रद्धा और आस्था के प्रतीक के रूप में लोगों द्वारा अपनाई गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि मसाने की होली न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से भी काशी की परंपराओं को जीवित रखने में मदद करता है। घाट और आसपास के क्षेत्र इस अवसर पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों से गुलजार रहते हैं। स्थानीय प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर रखी है ताकि बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित रूप से इस पर्व का आनंद ले सकें।

परंपरा के अनुसार, मसाने की होली मणिकर्णिका घाट पर होने वाली अनोखी परंपरा है, जिसमें मृत्यु और जीवन के प्रतीकों का संगम देखने को मिलता है। भस्म, नरमुंडों की माला और शवयात्राओं के बीच साधु-संन्यासी जीवन-मरण और भौतिकता के विषय पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

इस तरह, काशी का मणिकर्णिका घाट हर साल मसाने की होली के समय श्रद्धा, भस्म और रंगों का अद्भुत मिश्रण प्रस्तुत करता है। इस अनोखे पर्व ने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि विदेशियों और धार्मिक शोधकर्ताओं का भी ध्यान आकर्षित किया है।

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