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लखनऊ में 100 साल पुरानी धर्मशाला की संपत्ति से बड़ी धोखाधड़ी, जांच शुरू

लखनऊ में 100 साल पुरानी धर्मशाला की संपत्ति से बड़ी धोखाधड़ी, जांच शुरू

लखनऊ के नामनेर चौराहे पर स्थित चुन्नीलाल अग्रवाल चैरिटेबल ट्रस्ट की 100 साल पुरानी धर्मशाला की बेशकीमती संपत्ति से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि कुछ कथित ट्रस्टियों और भूमाफियाओं ने मिलकर ट्रस्ट की ऐतिहासिक संपत्ति को धोखाधड़ी के जरिए बेचा। मामला इतना गंभीर है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचने के बाद प्रशासन ने इसकी गंभीर जांच का आदेश दिया है।

स्थानीय लोगों और ट्रस्ट सदस्यों के अनुसार, धर्मशाला की संपत्ति की कीमत करोड़ों में थी, लेकिन कथित रूप से इसे केवल पांच हजार रुपये के दानपत्र के आधार पर बेच दिया गया। इसमें सब-रजिस्ट्रार की कथित मिलीभगत की बात सामने आई है। इस तरह की धोखाधड़ी ने न सिर्फ ट्रस्ट और धर्मशाला की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाई है, बल्कि कानूनी और सामाजिक स्तर पर भी हलचल मचा दी है।

जैसा कि ट्रस्ट के सदस्यों ने बताया, चुन्नीलाल अग्रवाल चैरिटेबल ट्रस्ट दशकों से धर्म और समाज सेवा में सक्रिय रहा है। यह धर्मशाला, जो लगभग एक शताब्दी पुरानी है, विभिन्न धर्मार्थ कार्यों और समाजिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि धर्मशाला का ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व अत्यधिक है। ऐसे में इसका बेचे जाना समुदाय के लिए किसी झटके से कम नहीं है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत जांच शुरू कर दी है। पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी इस मामले की तह तक जाने के लिए सक्रिय हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, सब रजिस्ट्रार के दस्तावेज और दानपत्र से जुड़ी प्रक्रियाओं की जांच की जा रही है। साथ ही, भूमाफिया और कथित ट्रस्टियों की पहचान और उनके वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है।

वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मामले की रिपोर्ट मिलते ही उन्होंने उच्च अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यदि धोखाधड़ी साबित होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय लोगों और ट्रस्ट सदस्यों में आक्रोश देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की संपत्ति सिर्फ आर्थिक रूप से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह समाज और धार्मिक परंपराओं का भी हिस्सा है। ऐसे में इसके अवैध तरीके से बेचे जाने की खबर ने सभी को गहरा झटका दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया लंबी हो सकती है, लेकिन सरकार और प्रशासन द्वारा शीघ्र कार्रवाई और जांच करने से न्याय मिलने की संभावना बढ़ जाती है। ट्रस्ट के सदस्यों का भी कहना है कि वे हर संभव कानूनी माध्यम से अपनी संपत्ति और धर्मशाला की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।

इस प्रकार, नामनेर चौराहे की चुन्नीलाल अग्रवाल चैरिटेबल ट्रस्ट की 100 साल पुरानी धर्मशाला की संपत्ति से जुड़ी यह धोखाधड़ी न केवल स्थानीय लोगों के लिए बल्कि पूरे लखनऊ और समाज के लिए चिंता का विषय बन गई है। आने वाले दिनों में प्रशासन और पुलिस की जांच से इस मामले की सच्चाई सामने आएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है

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