पुरानी पेंशन और 8वें वेतन आयोग पर 23 को महामंथन, कर्मचारियों के प्रांतीय सम्मेलन में उठेंगी 4 बड़ी मांगें
सरकारी कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर 23 अगस्त को प्रांतीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में पुरानी पेंशन योजना (OPS), 8वें वेतन आयोग, कोरोना काल में रोके गए भत्तों की बहाली समेत चार प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होगी। कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के सामने मजबूती से पक्ष रखने की तैयारी की है। 8वें वेतन आयोग को लेकर भी देशभर में कर्मचारी संगठन वेतन, पेंशन और भत्तों में सुधार की मांग उठा रहे हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी कई मांगें लंबित हैं। सम्मेलन में इन मुद्दों पर रणनीति तैयार की जाएगी और सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए आगे की रूपरेखा तय की जाएगी।
पुरानी पेंशन बहाली सबसे बड़ी मांग
कर्मचारी संगठनों की सबसे प्रमुख मांग पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू करने की है। कर्मचारियों का तर्क है कि नई पेंशन व्यवस्था की तुलना में पुरानी पेंशन योजना से सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा अधिक मिलती है।
कर्मचारी संगठनों की ओर से लगातार मांग की जा रही है कि नई पेंशन योजना की समीक्षा कर पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल किया जाए। यह मांग कई राज्यों और केंद्र स्तर के कर्मचारी संगठनों द्वारा भी उठाई जा रही है।
8वें वेतन आयोग पर रहेगी नजर
सम्मेलन में 8वें वेतन आयोग को लेकर भी चर्चा होगी। कर्मचारियों की मांग है कि नए वेतन आयोग में वेतन संरचना, भत्तों और पेंशन में पर्याप्त सुधार किया जाए।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन लागत को देखते हुए वेतन और भत्तों में संशोधन जरूरी है। 8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारी संगठन फिटमेंट फैक्टर, पेंशन सुधार और भत्तों में बदलाव जैसी मांगें भी उठा रहे हैं।
कोरोना काल में रोके गए भत्तों की बहाली की मांग
कर्मचारियों की एक अन्य प्रमुख मांग कोरोना काल के दौरान रोके गए भत्तों को बहाल करने की है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि उस समय रोके गए महंगाई भत्ते और अन्य लाभों का भुगतान किया जाना चाहिए।
उनका कहना है कि कर्मचारियों ने महामारी के दौरान भी पूरी जिम्मेदारी के साथ काम किया था, इसलिए लंबित आर्थिक लाभों को वापस दिया जाना चाहिए। कई कर्मचारी संगठनों ने पहले भी इस मुद्दे को सरकार के सामने उठाया है।
सम्मेलन में बनेगी आंदोलन की रणनीति
प्रांतीय सम्मेलन में प्रदेशभर से कर्मचारी प्रतिनिधि शामिल होंगे। बैठक में मांगों को लेकर विस्तृत चर्चा की जाएगी और आगे के आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य सरकार तक अपनी समस्याएं पहुंचाना और समाधान की दिशा में पहल करवाना है। वे चाहते हैं कि कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े मुद्दों पर जल्द निर्णय लिया जाए।
चार प्रमुख मुद्दों पर होगा फोकस
सम्मेलन में मुख्य रूप से चार मांगों पर फोकस रहेगा—
- पुरानी पेंशन योजना की बहाली
- 8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों के हितों को शामिल करना
- कोरोना काल में रोके गए भत्तों का भुगतान
- कर्मचारियों से जुड़े अन्य लंबित आर्थिक और सेवा संबंधी मामलों का समाधान
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो आगे बड़े स्तर पर आंदोलन की रणनीति बनाई जा सकती है। 23 अगस्त का सम्मेलन कर्मचारियों की मांगों को लेकर एक अहम मंच माना जा रहा है, जहां भविष्य की दिशा तय होगी।

