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लखनऊ एयरपोर्ट बनेगा उत्तर भारत का बड़ा एविएशन हब, टर्मिनल-3 और रनवे विस्तार से बढ़ेगी क्षमता

लखनऊ एयरपोर्ट बनेगा उत्तर भारत का बड़ा एविएशन हब, टर्मिनल-3 और रनवे विस्तार से बढ़ेगी क्षमता

उत्तर प्रदेश की राजधानी का चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा तेजी से उत्तर भारत के प्रमुख एविएशन हब के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। बढ़ती यात्री संख्या और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए एयरपोर्ट पर बड़े पैमाने पर विस्तार और आधुनिकीकरण का काम जारी है। इसमें 1.37 करोड़ यात्रियों की वार्षिक क्षमता वाले टर्मिनल-3, रनवे विस्तार, एयरसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर और कार्गो सुविधाओं का विकास शामिल है।

एयरपोर्ट से लगातार बढ़ रही यात्रियों की संख्या ने सुविधाओं के विस्तार की जरूरत को और बढ़ा दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में लखनऊ एयरपोर्ट से करीब 62 लाख यात्रियों ने हवाई सफर किया। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मौजूदा टर्मिनल और अन्य सुविधाओं पर दबाव बढ़ रहा है, इसलिए एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ाने की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है।

टर्मिनल-3 से बढ़ेगी यात्री क्षमता

एयरपोर्ट विस्तार परियोजना में सबसे अहम टर्मिनल-3 का निर्माण है। इसकी सालाना यात्री क्षमता करीब 1.37 करोड़ होगी। नया टर्मिनल शुरू होने के बाद यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन में भी आसानी होगी।

टर्मिनल-3 में आधुनिक यात्री सुविधाएं, बेहतर चेक-इन व्यवस्था, सुरक्षा जांच के लिए अत्याधुनिक सिस्टम और यात्रियों के आराम के लिए कई सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इससे भीड़ प्रबंधन बेहतर होगा और यात्रियों को लंबी कतारों से राहत मिल सकेगी।

रनवे और एयरसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर

यात्रियों के साथ-साथ विमानों की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए रनवे और एयरसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत किया जा रहा है। रनवे विस्तार और अन्य तकनीकी सुविधाओं के विकास से बड़े विमानों के संचालन में मदद मिलेगी। इसके अलावा विमान पार्किंग क्षेत्र, टैक्सीवे और अन्य जरूरी सुविधाओं को भी अपग्रेड किया जा रहा है।

कार्गो सुविधाओं से व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

एयरपोर्ट पर कार्गो सुविधाओं के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आधुनिक कार्गो व्यवस्था से उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पाद, फार्मा सेक्टर और उद्योगों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। इससे व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

उत्तर भारत के लिए रणनीतिक महत्व

लखनऊ की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा उत्तर भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी केंद्र बन सकता है। एयरपोर्ट के विस्तार से न केवल यात्रियों को फायदा होगा, बल्कि पर्यटन, निवेश और औद्योगिक विकास को भी गति मिलने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में लखनऊ एयरपोर्ट की बढ़ी हुई क्षमता इसे देश के प्रमुख हवाई अड्डों की श्रेणी में शामिल करने में मदद करेगी। आधुनिक सुविधाओं और बेहतर कनेक्टिविटी के साथ यह एयरपोर्ट उत्तर भारत के एविएशन नेटवर्क में अहम भूमिका निभा सकता है।

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