लखनऊ में कथक के ताल, लय और संगत पर व्याख्यान-सह-प्रदर्शन, विद्यार्थियों ने सीखी बारीकियां
लखनऊ के कैसरबाग स्थित राय उमनाथ बाली प्रेक्षागृह में सोमवार को कथक नृत्य और संगीत से जुड़ा विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। ‘ताल, लय और संगत- कथक नृत्य एवं गायन के संदर्भ में’ विषय पर आयोजित व्याख्यान-सह-प्रदर्शन में विद्यार्थियों को कथक की बारीकियों से परिचित कराया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को कथक नृत्य और शास्त्रीय संगीत में ताल, लय और संगत की भूमिका को व्यावहारिक रूप से समझाना था। वक्ताओं और कलाकारों ने प्रस्तुति के माध्यम से इन तीनों पहलुओं को समझाया, जिससे विद्यार्थियों को विषय को करीब से जानने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के दौरान कथक नृत्य में ताल और लय के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। कलाकारों ने प्रदर्शन के जरिए बताया कि कथक में नृत्य की गतियों, पद संचालन और भावाभिव्यक्ति को ताल और लय के साथ किस तरह जोड़ा जाता है। इसके साथ ही गायन और वाद्य संगत की भूमिका को भी उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया।
व्याख्यान-सह-प्रदर्शन में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही। उन्होंने कथक और संगीत से संबंधित विभिन्न पहलुओं को समझा और कलाकारों की प्रस्तुतियों को करीब से देखा। कार्यक्रम में सैद्धांतिक जानकारी के साथ व्यावहारिक प्रदर्शन होने के कारण विद्यार्थियों को विषय को बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिला।
आयोजकों के अनुसार, शास्त्रीय कलाओं की शिक्षा केवल पुस्तकीय जानकारी तक सीमित नहीं है। कलाकारों की प्रत्यक्ष प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों को कला की तकनीकी बारीकियां समझाने का प्रयास किया गया। कथक जैसी शास्त्रीय नृत्य विधा में ताल, लय और संगत के बीच सामंजस्य बेहद महत्वपूर्ण होता है।
राय उमनाथ बाली प्रेक्षागृह में आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को कथक नृत्य और गायन की परंपरा से जुड़ने का अवसर दिया। कार्यक्रम के दौरान कला के अभ्यास, प्रस्तुति और संगीत के समन्वय पर भी जानकारी साझा की गई।
इस तरह सोमवार को आयोजित व्याख्यान-सह-प्रदर्शन में कथक नृत्य और संगीत के तकनीकी पक्षों को प्रदर्शन के माध्यम से समझाया गया। विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में रुचि के साथ भाग लिया और शास्त्रीय कला की विभिन्न बारीकियों को जानने का अवसर प्राप्त किया।

