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लखनऊ में पतंगबाजी का शौक, लेकिन खतरे से भी नाता

लखनऊ में पतंगबाजी का शौक, लेकिन खतरे से भी नाता

राजधानी लखनऊ में पतंगबाजी का शौक अब भी लोगों में बेहद लोकप्रिय है। शहर में करीब 200 पतंग क्लब सक्रिय हैं, जबकि पतंग की बिक्री के लिए लगभग 25 बड़ी दुकानें और 250 से अधिक छोटी-मझोली दुकानें हैं। यह संख्या यह दर्शाती है कि लखनऊ में पतंगबाजी सिर्फ एक खेल ही नहीं बल्कि एक संस्कृति और व्यवसाय भी बन चुकी है।

स्थानीय पतंगबाजों का कहना है कि पुराने और अनुभवी खिलाड़ी खतरनाक मांझे का इस्तेमाल नहीं करते। उनका कहना है कि पारंपरिक पतंगबाजी में केवल मक्खन, रेशमी डोर या पारंपरिक मांझा ही इस्तेमाल होता है, जो खेल और मनोरंजन के लिए सुरक्षित माने जाते हैं।

शहर में पतंग और मांझे की जितनी भी दुकानें हैं, उनमें सभी दुकानों में पारंपरिक मांझे की ही बिक्री होती है। इससे यह साबित होता है कि अधिकांश दुकानदार और पुराने पतंगबाज खतरनाक और प्रतिबंधित मांझों से दूर रहते हैं।

हालांकि, हाल के वर्षों में बढ़ती प्रतिबंधित मांझों और चीनी मांझों की घटनाओं ने शहरवासियों को सतर्क कर दिया है। प्रशासन और पुलिस ने चेतावनी दी है कि धारदार और खतरनाक मांझों का उपयोग करने वाले पतंगबाजों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने पतंगबाजों की पारंपरिक तकनीक और अनुभव सुरक्षित पतंगबाजी की मिसाल हैं। उनका मानना है कि युवा और नए खिलाड़ी, जो खतरनाक मांझों का प्रयोग करते हैं, उन्हें सुरक्षा और नियमों के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए।

स्थानीय क्लब और पतंग दुकानें इस दिशा में कदम उठा रही हैं। उन्होंने कहा कि वे सुरक्षित पतंग और पारंपरिक मांझे बेचने पर जोर दे रहे हैं। साथ ही, उन्होंने युवा खिलाड़ियों को सुरक्षित पतंगबाजी के लिए प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देने की योजना बनाई है।

लखनऊ में यह स्थिति यह भी दिखाती है कि सुरक्षा और परंपरा का संतुलन बनाए रखना संभव है। पुराने पतंगबाज अपनी तकनीक और अनुभव से शहर में मनोरंजन और उत्सव का सुरक्षित माहौल बनाए रखने में मदद कर रहे हैं।

स्थानीय प्रशासन ने भी चेतावनी दी है कि खतरनाक मांझों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस और नगर निगम ने मिलकर शहर के प्रमुख पतंग उड़ाने वाले स्थानों की निगरानी बढ़ा दी है। इसके अलावा, लोगों को भी यह निर्देश दिए गए हैं कि वे सुरक्षित और पारंपरिक मांझों का ही उपयोग करें।

इस प्रकार, लखनऊ में पतंगबाजी का शौक अभी भी जीवित है, लेकिन इसे सुरक्षित और परंपरागत तरीके से करने की आवश्यकता है। पुराने पतंगबाज इस खेल और संस्कृति को सुरक्षित बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

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