कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़, 6 डॉक्टर समेत कई गिरफ्तार; अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा
उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस ने एक बड़े और संगठित किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में छह प्रतिष्ठित डॉक्टरों सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एंबुलेंस चालक शिवम अग्रवाल की गिरफ्तारी भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार यह गिरोह अवैध अंग प्रत्यारोपण के जरिए करोड़ों रुपये का नेटवर्क चला रहा था।
जांच में सामने आया है कि यह रैकेट एक संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के रूप में काम कर रहा था, जिसमें मरीजों और जरूरतमंदों को अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध कराई जाती थी। इसके लिए 1 करोड़ रुपये तक की भारी रकम वसूले जाने की बात भी सामने आई है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस गिरोह में शामिल डॉक्टरों की टीम कथित तौर पर गोपनीय तरीके से ऑपरेशन करती थी। बताया जा रहा है कि नोएडा से जुड़े कुछ डॉक्टर आधी रात के समय अवैध ट्रांसप्लांट ऑपरेशन को अंजाम देते थे, ताकि किसी को शक न हो और अस्पताल रिकॉर्ड में हेरफेर किया जा सके।
इस पूरे नेटवर्क का संचालन बेहद संगठित तरीके से किया जा रहा था, जिसमें मरीजों की पहचान बदलने से लेकर दस्तावेजों की फर्जीवाड़े तक की व्यवस्था शामिल थी। एंबुलेंस चालक शिवम अग्रवाल पर आरोप है कि वह मरीजों और अंगों की अवैध आवाजाही में अहम भूमिका निभाता था।
पुलिस ने बताया कि शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यह गिरोह केवल राज्य स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ था। इसी आधार पर जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने नेपाल और पश्चिम बंगाल तक अपने सुरागों को ट्रेस करना शुरू कर दिया है।
अधिकारियों का कहना है कि इस रैकेट में शामिल कई अन्य लोग अभी फरार हैं, जिन पर इनाम घोषित किया जा सकता है। पुलिस का मानना है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क के और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
कानपुर पुलिस ने बताया कि यह मामला बेहद संवेदनशील और गंभीर है, जिसमें मेडिकल पेशे से जुड़े कुछ लोगों की संलिप्तता ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और डिजिटल साक्ष्य, बैंक लेनदेन तथा मरीजों के रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है।
पुलिस ने कहा है कि इस पूरे गिरोह को जड़ से खत्म करने के लिए कई विशेष टीमें बनाई गई हैं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी निर्दोष व्यक्ति को इस जांच में नुकसान न पहुंचे।
इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और निजी अस्पतालों में निगरानी को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और जल्द ही और गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है।

