नौकरी, मानदेय, कैशलेश इलाज... यूपी चुनाव से पहले नए लाभार्थी समूह तैयार करने में जुटी योगी सरकार
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले योगी सरकार अलग-अलग कर्मचारी और सामाजिक समूहों के लिए आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े फैसलों पर जोर दे रही है। हाल के दिनों में मानदेय बढ़ाने, कैशलेश इलाज की सुविधा देने और रोजगार से जुड़े फैसलों के जरिए कई वर्गों को सीधे लाभ देने की घोषणाएं हुई हैं। इन कदमों को राजनीतिक विश्लेषण में नए लाभार्थी समूह तैयार करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
सबसे हालिया फैसलों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का मानदेय बढ़ाना शामिल है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 8 हजार रुपये से बढ़ाकर 12 हजार रुपये प्रतिमाह और सहायिकाओं का मानदेय 4 हजार से बढ़ाकर 6 हजार रुपये किया गया है। इसके साथ ही दोनों वर्गों को परिवार सहित सालाना 5 लाख रुपये तक कैशलेश इलाज की सुविधा देने की घोषणा की गई है। राज्य में करीब 2.91 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं इस व्यवस्था से जुड़ी हैं।
पीआरडी जवानों के लिए भी सरकार ने दैनिक भत्ते में बढ़ोतरी की है। जारी आदेश के मुताबिक अगले महीने से पीआरडी जवानों को 600 रुपये प्रतिदिन का भुगतान किया जाएगा। यह फैसला राज्यभर में तैनात पीआरडी जवानों से जुड़ा है।
शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों के लिए भी कैशलेश चिकित्सा सुविधा शुरू की गई है। मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेश चिकित्सा सुविधा योजना के तहत शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और शिक्षा विभाग से जुड़े अन्य कर्मचारियों तथा उनके परिवारों को चिकित्सा सुविधा देने की व्यवस्था की गई है। इससे करीब 12 लाख लोग जुड़े होने की जानकारी सामने आई है।
सरकार की नजर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं और ग्रामीण श्रमिकों पर भी है। अगस्त में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इन वर्गों समेत अन्य समूहों को कैशलेश चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए थे।
इन फैसलों का असर सिर्फ सीधे लाभ पाने वाले कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। मानदेय बढ़ोतरी और परिवार के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा जैसी योजनाओं से लाभार्थियों के परिवार भी जुड़ते हैं। यही वजह है कि चुनाव से पहले सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का दायरा बढ़ाने की कवायद को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, सरकार की ओर से इन फैसलों को चुनावी रणनीति के तौर पर पेश नहीं किया गया है। आधिकारिक तौर पर इन्हें कर्मचारियों और विभिन्न सामाजिक वर्गों के कल्याण तथा उनकी आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े कदमों के रूप में बताया गया है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषण में इन्हें चुनाव से पहले लाभार्थी आधार मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां अभी से तेज हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में रोजगार, मानदेय, स्वास्थ्य सुविधा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े और फैसले सामने आते हैं या नहीं, इस पर नजर रहेगी।

