पड़ोसी के घर की ओर CCTV कैमरा लगाना निजता का उल्लंघन, इलाहाबाद हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निजी सीसीटीवी कैमरे लगाने को लेकर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति अपने घर या परिसर में सीसीटीवी कैमरा इस तरह से नहीं लगा सकता और न ही उसे इस तरह सेट कर सकता है, जिससे पड़ोसी के निजता के अधिकार का हनन हो। किसी भी व्यक्ति को अपने पड़ोसी की निजी जिंदगी में दखल देने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
कोर्ट की इस टिप्पणी से उन मामलों में महत्वपूर्ण संदेश गया है, जहां लोग सुरक्षा के नाम पर अपने घरों या प्रतिष्ठानों में कैमरे लगाते समय आसपास के लोगों की निजता का ध्यान नहीं रखते। सीसीटीवी कैमरे का उद्देश्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है, लेकिन इसका इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति की निजी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए नहीं किया जा सकता।
सुरक्षा के नाम पर निजता से समझौता नहीं
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि निजी सीसीटीवी कैमरे लगाने का अधिकार असीमित नहीं है। किसी व्यक्ति को अपने घर और संपत्ति की सुरक्षा के लिए कैमरा लगाने की स्वतंत्रता हो सकती है, लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल पड़ोसी की निजता में हस्तक्षेप करने के लिए नहीं किया जा सकता।
यदि कैमरे का एंगल या उसकी सेटिंग इस तरह रखी जाती है कि उससे पड़ोसी के घर के निजी हिस्से या व्यक्तिगत गतिविधियां रिकॉर्ड हों, तो यह निजता के अधिकार से जुड़ा गंभीर सवाल बन सकता है।
पड़ोसी की निजी जिंदगी में दखल की अनुमति नहीं
कोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपने पड़ोसी की निजता में दखल देने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसका मतलब है कि सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरों की दिशा और उनकी रिकॉर्डिंग की सीमा का ध्यान रखना जरूरी है।
आजकल घरों, दुकानों और आवासीय कॉलोनियों में सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। कई लोग मुख्य दरवाजे, पार्किंग और आसपास के हिस्सों की निगरानी के लिए कैमरे लगाते हैं। ऐसे में कैमरे की लोकेशन और एंगल तय करते समय यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उससे किसी दूसरे व्यक्ति के निजी स्थान की रिकॉर्डिंग न हो।
हाईकोर्ट की यह टिप्पणी सुरक्षा और व्यक्तिगत निजता के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत को रेखांकित करती है। हालांकि, इस मामले में कोर्ट के विस्तृत आदेश और संबंधित पक्षों के तथ्यों के आधार पर ही इसके कानूनी प्रभावों की पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।

