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वीडियो में देंखे प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच टकराव तेज, वसंत पंचमी स्नान न करने का ऐलान

वीडियो में देंखे प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच टकराव तेज, वसंत पंचमी स्नान न करने का ऐलान

माघ मेला क्षेत्र में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है। इसी बीच अविमुक्तेश्वरानंद ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि जब तक प्रशासन सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगता, तब तक वह वसंत पंचमी का स्नान नहीं करेंगे। उनके इस ऐलान के बाद माघ मेले की धार्मिक और राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।

अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि माघ मेला प्रशासन केवल नोटिस देने का खेल खेल रहा है। उन्होंने कहा, “अभी मेरा मौनी अमावस्या का स्नान ही नहीं हुआ है, तो मैं वसंत पंचमी का स्नान कैसे कर लूं? पहले जो परंपरा टूटी है, उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?” उन्होंने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए इसे संत परंपराओं का अपमान बताया।

इस विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना किसी का नाम लिए कड़ा संदेश दिया है। सीएम योगी ने कहा कि किसी को भी धार्मिक परंपराओं को बाधित करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, “ऐसे तमाम कालनेमि हैं, जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं। हमें ऐसे लोगों से सतर्क रहने की जरूरत है।” मुख्यमंत्री के इस बयान को अविमुक्तेश्वरानंद के हालिया रुख से जोड़कर देखा जा रहा है।

सीएम योगी के बयान के बाद संत समाज और श्रद्धालुओं के बीच चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कई संतों का मानना है कि माघ मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन और परंपरा का प्रतीक है। ऐसे में किसी भी तरह का विवाद सनातन धर्म की छवि को नुकसान पहुंचाता है।

इसी कड़ी में माघ मेले से अयोध्या पहुंचे योग गुरु बाबा रामदेव ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। बाबा रामदेव ने कहा कि माघ मेला स्नान, ध्यान, तप और संतों की साधना का पावन पर्व है। उन्होंने कहा, “किसी के पास अगर कोई उपाधि है, तो उसका दायित्व भी उतना ही बढ़ जाता है। जो विवाद हो रहा है, उससे सनातन धर्म का अनादर हो रहा है।”

बाबा रामदेव ने संतों को आत्ममंथन की सलाह देते हुए कहा कि साधु बनने का अर्थ केवल वेश धारण करना नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर हम साधु बने हैं, तो साधुता की पहली सीढ़ी निरभिमानी होना है। अहंकार से ऊपर उठकर ही संत समाज को दिशा देनी चाहिए।” उनके इस बयान को विवाद को शांत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

माघ मेला प्रशासन की ओर से अब तक इस पूरे विवाद पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि मेले की परंपराएं और व्यवस्थाएं तय नियमों के अनुसार संचालित की जा रही हैं।

फिलहाल प्रयागराज में माघ मेला अपने चरम पर है और लाखों श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। ऐसे में संतों और प्रशासन के बीच बढ़ता टकराव चिंता का विषय बन गया है। धार्मिक जानकारों का मानना है कि संवाद और संयम के जरिए ही इस विवाद का समाधान संभव है, ताकि माघ मेला अपनी पवित्रता और गरिमा बनाए रख सके।

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