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प्रेम विवाद में युवती ने सरयू नदी में छलांग लगाकर आत्मघाती कदम उठाया

प्रेम विवाद में युवती ने सरयू नदी में छलांग लगाकर आत्मघाती कदम उठाया

कहते हैं कि क्षणिक गुस्सा और विवाद यदि काबू में न रहे तो पूरे जीवन का पछतावा दे जाते हैं। उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है। थाना दोहरीघाट और गोरखपुर के बड़हलगंज बॉर्डर के बीच बहने वाली सरयू नदी में एक युवती ने प्रेमी से नाराज होकर आत्मघाती कदम उठाया।

स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना उस समय हुई जब युवती अपने प्रेमी के साथ किसी बात को लेकर नाराज थी। गुस्से और हताशा में आकर उसने नदी में छलांग लगा दी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है, जिसमें युवती का नदी में छलांग लगाने का क्षण कैद है। वीडियो देखकर स्थानीय लोग भी हैरान और सन्न रह गए।

सूत्रों के अनुसार, नदी के किनारे मौजूद कुछ स्थानीय लोगों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और युवती को बचाने के लिए प्रयास शुरू कर दिया। पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम ने भी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में मदद की।

पुलिस ने बताया कि युवती फिलहाल सुरक्षित है और उसे स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक चिकित्सा प्रदान की गई है। साथ ही, उसकी मानसिक स्थिति का आकलन करने के लिए मनोवैज्ञानिक सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रेम संबंधों में उत्पन्न तनाव और विवाद अक्सर गंभीर परिणाम दे सकते हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की है कि क्रोध और निराशा में ऐसे कदम न उठाएं और किसी भी मानसिक तनाव की स्थिति में परिवार और मित्रों से मदद लें।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रेम संबंधों में असहमति या विवाद के कारण उठाया गया आत्मघाती कदम गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। उन्होंने युवाओं और अभिभावकों को मानसिक स्वास्थ्य और परामर्श सेवाओं से जुड़ने की सलाह दी।

पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और घटना के सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। पुलिस का उद्देश्य है कि ऐसी घटनाओं को रोकने और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर सामुदायिक जागरूकता बढ़ाने के लिए कदम उठाए जाएं।

अंततः, मऊ जिले में सरयू नदी में हुई यह घटना प्रेम विवाद और क्षणिक गुस्से के खतरनाक परिणामों को उजागर करती है। प्रशासन, परिवार और समाज के सभी वर्गों को मिलकर युवाओं में संवाद, संयम और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि इस तरह के जीवन-खतरनाक कदमों से बचाव हो सके।

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