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बांदा में पारिवारिक विवाद का मामला, 2004 में हो चुका था चार भाइयों में बंटवारा

बांदा में पारिवारिक विवाद का मामला, 2004 में हो चुका था चार भाइयों में बंटवारा

जिले के नरैनी कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत रामनगर अतर्रा रोड निवासी प्रकाशचंद्र उर्फ मिठाई लाल गुप्ता ने पारिवारिक स्थिति को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने बताया कि वे चार भाई हैं और सभी का पैतृक मकान है, जिसमें वर्ष 2004 में आपसी सहमति से बंटवारा हो चुका है। इसके बाद से सभी भाई अपने-अपने हिस्से में रह रहे हैं और अलग-अलग जीवन यापन कर रहे हैं।

प्रकाशचंद्र गुप्ता ने बताया कि चार भाइयों में सबसे बड़े भाई गुलाबचंद्र, उसके बाद तेजचंद्र, स्वयं प्रकाशचंद्र और सबसे छोटे सुभाषचंद्र हैं। बंटवारे के समय घर और संपत्ति को बराबर हिस्सों में विभाजित किया गया था, जिसके बाद से किसी प्रकार का पारिवारिक विवाद नहीं था। सभी भाई अपने-अपने परिवार के साथ शांतिपूर्वक रह रहे थे।

उन्होंने बताया कि वे अपने हिस्से में स्थित मकान में ही जनरल स्टोर की दुकान संचालित करते हैं। यह दुकान लंबे समय से परिवार की आजीविका का मुख्य साधन रही है। वर्तमान समय में दुकान का संचालन उनके दोनों बेटे कर रहे थे। प्रकाशचंद्र का कहना है कि दुकान पूरी तरह वैध है और वर्षों से उसी स्थान पर चलाई जा रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, गुप्ता परिवार इलाके में पुराने और प्रतिष्ठित व्यापारियों में गिना जाता है। जनरल स्टोर पर आसपास के लोग रोजमर्रा की जरूरत का सामान लेने आते हैं। प्रकाशचंद्र ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में हमेशा नियमों और कानून का पालन किया है और पारिवारिक मामलों को आपसी सहमति से सुलझाने का प्रयास किया है।

प्रकाशचंद्र गुप्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2004 में हुए बंटवारे के बाद से किसी भी भाई ने एक-दूसरे के हिस्से में हस्तक्षेप नहीं किया। सभी अपने-अपने हिस्से में स्वतंत्र रूप से रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि पारिवारिक संपत्ति को लेकर किसी भी प्रकार का विवाद खड़ा करना गलत है और इससे समाज में गलत संदेश जाता है।

सूत्रों के मुताबिक, हाल के दिनों में संपत्ति या दुकान को लेकर किसी प्रकार की शिकायत या विवाद की चर्चा सामने आई थी, जिसके बाद प्रकाशचंद्र ने अपना पक्ष सार्वजनिक रूप से रखने की आवश्यकता महसूस की। उन्होंने कहा कि उनके दोनों बेटे ईमानदारी से दुकान संभाल रहे थे और परिवार की रोजी-रोटी उसी पर निर्भर है।

स्थानीय प्रशासन और पुलिस का कहना है कि यदि कोई विवाद या शिकायत सामने आती है, तो उसकी जांच निष्पक्ष रूप से की जाएगी। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संपत्ति का बंटवारा वर्षों पहले हो चुका है और सभी पक्ष अपने-अपने हिस्से में रह रहे हैं।

कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि किसी परिवार में आपसी सहमति से बंटवारा हो चुका हो और सभी सदस्य अपने हिस्से में रह रहे हों, तो ऐसे मामलों में विवाद की गुंजाइश कम होती है। फिर भी, यदि कोई पक्ष शिकायत करता है, तो दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर ही निर्णय लिया जाता है।

कुल मिलाकर, प्रकाशचंद्र उर्फ मिठाई लाल गुप्ता द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह मामला पुराने बंटवारे और पारिवारिक व्यवस्था से जुड़ा है। अब देखना होगा कि यदि भविष्य में कोई विवाद सामने आता है, तो प्रशासन और न्यायिक प्रक्रिया इसे किस तरह से सुलझाती है।

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