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चिट फंड ठगी के आरोप में कन्हैया गुलाटी और राजेश मौर्य की हिस्ट्रीशीट खोली

चिट फंड ठगी के आरोप में कन्हैया गुलाटी और राजेश मौर्य की हिस्ट्रीशीट खोली

बारादरी थाने की पुलिस ने चिट फंड कंपनियों के जरिए ढाई हजार करोड़ रुपये की ठगी के आरोप में कन्हैया गुलाटी और राजेश मौर्य की बी श्रेणी की हिस्ट्रीशीट खोलने की कार्रवाई की है। आरोपियों ने उत्तर प्रदेश के साथ-साथ दिल्ली, बिहार और झारखंड के निवेशकों को झांसा देकर लाखों लोगों का भरोसा तोड़ा।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों आरोपियों के खिलाफ जिले के अलग-अलग थानों में 34-34 नए मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों की जांच विशेष जांच टीम (एसआईटी) कर रही है। हाल ही में डीआईजी ने एसआईटी को तलब करके आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

बारादरी थाने के अधिकारियों ने बताया कि हिस्ट्रीशीट खोलने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरोपियों के खिलाफ लंबित और नए मामले दोनों की कानूनी कार्रवाई समय पर हो सके। बी श्रेणी की हिस्ट्रीशीट में उनके आपराधिक इतिहास, इलाके और गतिविधियों का पूरा ब्यौरा दर्ज किया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि चिट फंड और निवेश संबंधी ठगी में आरोपी अक्सर लंबी अवधि तक जांच से बचते हैं। ऐसे में हिस्ट्रीशीट खोलना पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करता है। यह कदम न केवल कानूनी कार्रवाई में मदद करता है बल्कि भविष्य में ऐसे अपराधों की रोकथाम में भी सहायक होता है।

पुलिस ने कहा कि अब तक दर्ज मामलों की जांच के लिए एसआईटी सभी सबूत इकट्ठा कर रही है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि आरोपी के बैंक खाते, निवेश रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल ट्रैक का भी विश्लेषण किया जा रहा है। इसके आधार पर निवेशकों को हुए नुकसान की वसूली के प्रयास किए जाएंगे।

स्थानीय लोगों और पीड़ित निवेशकों ने पुलिस की कार्रवाई का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर हुई ठगी के मामले में हिस्ट्रीशीट खोलने और जांच तेज करने से उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है। कई निवेशक पहले डर और लंबित कानूनी प्रक्रिया के कारण शिकायत दर्ज कराने से हिचकिचा रहे थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि चिट फंड घोटाले जैसे बड़े मामलों में पुलिस और न्यायिक कार्रवाई की पारदर्शिता और समयबद्धता जरूरी है। हिस्ट्रीशीट खोलना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे आरोपी के किसी भी छुपे हुए नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक की कार्रवाई के बाद किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी। डीआईजी और एसआईटी लगातार मामलों की निगरानी कर रहे हैं और आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द मुकदमा चलाने का प्रयास किया जा रहा है।

इस कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि बड़े पैमाने पर निवेशकों को धोखा देने वाले अपराधियों को कानून के हाथों नहीं बचाया जाएगा। बरेली पुलिस और एसआईटी की यह पहल निवेशकों की सुरक्षा और वित्तीय अपराधों की रोकथाम के लिए मिसाल साबित हो सकती है।

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