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ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के आदेश पर हाईकोर्ट में चुनौती, आज फिर होगी सुनवाई

ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के आदेश पर हाईकोर्ट में चुनौती, आज फिर होगी सुनवाई

प्रदेश में पंचायत चुनाव से पहले योगी सरकार के एक अहम आदेश को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। वर्तमान ग्राम प्रधानों को नए पंचायत चुनाव होने और नए प्रधानों के चुने जाने तक प्रशासक नियुक्त करने संबंधी राज्य सरकार के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में चुनौती दी गई है। मामले में बुधवार को भी सुनवाई होनी है।

सरकार के आदेश पर उठे सवाल

याचिका में राज्य सरकार के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत वर्तमान ग्राम प्रधानों को उनके कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी नए प्रधानों के निर्वाचन तक प्रशासक के रूप में कार्य करने की अनुमति दी गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस व्यवस्था की वैधानिकता और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूपता की न्यायिक समीक्षा की जानी चाहिए।

हाईकोर्ट ने मांगा सरकार का पक्ष

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को सरकार से समुचित दिशा-निर्देश प्राप्त कर अदालत के समक्ष विस्तृत पक्ष रखने को कहा है। कोर्ट ने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि आदेश किस कानूनी आधार पर जारी किया गया और इसके पीछे क्या प्रशासनिक आवश्यकता है।

आज फिर होगी सुनवाई

मामले की अगली सुनवाई बुधवार को निर्धारित की गई है। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल किए जाने और आदेश के औचित्य पर अदालत के समक्ष पक्ष रखे जाने की संभावना है।

पंचायत चुनाव से जुड़ा अहम मामला

यह मामला पंचायत चुनाव की प्रक्रिया और ग्राम पंचायतों के प्रशासनिक संचालन से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। ऐसे में हाईकोर्ट का फैसला प्रदेश की हजारों ग्राम पंचायतों की व्यवस्था और आगामी पंचायत चुनावों की तैयारियों पर असर डाल सकता है।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी इस मामले पर नजर बनी हुई है, क्योंकि अदालत का निर्णय पंचायत प्रशासन की अंतरिम व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण दिशा तय कर सकता है।

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