Samachar Nama
×

SC-ST एक्ट के दुरुपयोग पर हाईकोर्ट सख्त, पूरे यूपी में बार-बार राहत मांगने वालों की होगी जांच

SC-ST एक्ट के दुरुपयोग पर हाईकोर्ट सख्त, पूरे यूपी में बार-बार राहत मांगने वालों की होगी जांच

एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) एक्ट के तहत मिलने वाली आर्थिक राहत राशि के संभावित दुरुपयोग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने उत्तर प्रदेश में इस कानून के तहत राहत राशि के दावों और भुगतान की व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं। खासतौर पर ऐसे मामलों की जांच की जाएगी, जिनमें एक ही व्यक्ति या उसके परिवार के सदस्य अलग-अलग मामलों में बार-बार राहत राशि का दावा करते रहे हैं।

मामला झांसी से जुड़े दो आपराधिक मामलों की सुनवाई के दौरान सामने आया। कोर्ट ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए पाया कि अधिवक्ता संतोष कुमार दोहरे और उनके परिवार के सदस्यों को अलग-अलग आपराधिक मामलों में कुल 23 लाख 36 हजार 250 रुपये की राहत या आर्थिक सहायता मिल चुकी थी। इसके अलावा करीब 10 से 12 अन्य दावों के लंबित होने की जानकारी भी अदालत के सामने आई।

पूरे प्रदेश में होगी दावों की जांच

हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को यह जांच करने का निर्देश दिया है कि एससी-एसटी एक्ट और 1995 के नियमों के तहत राहत राशि का दावा और वितरण किस प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। कोर्ट यह भी देखना चाहता है कि राहत जारी करने से पहले पर्याप्त सत्यापन और जांच की जा रही है या नहीं। संभावित गड़बड़ी सामने आने पर सुधारात्मक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

बार-बार दावा करना अकेले दुरुपयोग का सबूत नहीं

हालांकि हाईकोर्ट ने एक अहम बात भी स्पष्ट की है। अदालत ने कहा कि केवल बार-बार आपराधिक मामले दर्ज होना और उसके बाद राहत राशि का दावा किया जाना अपने आप में दुरुपयोग साबित नहीं करता। इसलिए जांच का उद्देश्य वास्तविक पीड़ितों को मिलने वाली वैध सहायता रोकना नहीं, बल्कि व्यवस्था में संभावित गड़बड़ी की पहचान करना है।

तीन महीने में जांच पूरी करने के निर्देश

अदालत ने संबंधित व्यवस्था की निगरानी मजबूत करने पर भी जोर दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक जांच को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही एससी-एसटी एक्ट के मामलों की सुनवाई करने वाले विशेष न्यायाधीशों को भी राहत राशि के दावों में संभावित दुरुपयोग को लेकर सतर्क रहने को कहा गया है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वास्तविक पीड़ितों को कानून के तहत मिलने वाला लाभ किसी भी स्थिति में नहीं रुकना चाहिए। यानी हाईकोर्ट का फोकस राहत योजना के दुरुपयोग पर रोक लगाने के साथ-साथ पात्र पीड़ितों के अधिकार सुरक्षित रखने पर भी है।

Share this story

Tags