अवैध हूटर और प्रेशर हॉर्न पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को 3 महीने में साइलेंस जोन बनाने के निर्देश
अवैध हूटर और प्रेशर हॉर्न के इस्तेमाल को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सरकार को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत तीन महीने के भीतर साइलेंस जोन बनाने और अवैध हूटर व प्रेशर हॉर्न की बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत के इस रुख से नियमों का उल्लंघन कर तेज आवाज वाले उपकरणों का इस्तेमाल करने वालों पर कार्रवाई की उम्मीद बढ़ गई है।
ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के निर्देश
वाहनों में तेज आवाज वाले हूटर और प्रेशर हॉर्न का इस्तेमाल आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता है। इनकी तेज आवाज से अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और अन्य संवेदनशील इलाकों में शांति प्रभावित होती है। ऐसे में हाईकोर्ट ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए सरकार को प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
अदालत के निर्देशों के अनुसार, सरकार को निर्धारित समयसीमा के भीतर साइलेंस जोन बनाने की दिशा में काम करना होगा। इन क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी होगा।
अवैध हूटर और प्रेशर हॉर्न की बिक्री पर रोक
हाईकोर्ट ने अवैध हूटर और प्रेशर हॉर्न की बिक्री रोकने के निर्देश भी दिए हैं। ऐसे उपकरणों की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रभावी नियंत्रण के लिए संबंधित विभागों को निगरानी व्यवस्था मजबूत करनी होगी। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण होगा।
वाहनों में निर्धारित मानकों के विपरीत तेज आवाज करने वाले हॉर्न और हूटर का इस्तेमाल ध्वनि प्रदूषण बढ़ाता है। कई बार इनका उपयोग अनावश्यक रूप से सड़क पर किया जाता है, जिससे राहगीरों, बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों को परेशानी होती है।
साइलेंस जोन में नियमों का पालन जरूरी
साइलेंस जोन का उद्देश्य अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य संवेदनशील स्थानों के आसपास शोर को नियंत्रित करना है। इन क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का पालन कराना प्रशासन की जिम्मेदारी होती है।
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद सरकार और संबंधित विभागों को साइलेंस जोन की पहचान, आवश्यक व्यवस्थाओं और नियमों के क्रियान्वयन पर ध्यान देना होगा। साथ ही अवैध उपकरणों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए भी प्रभावी कदम उठाने होंगे।
तीन महीने की समयसीमा में कार्रवाई की चुनौती
अदालत ने सरकार को इन निर्देशों पर अमल करने के लिए तीन महीने का समय दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग तय समयसीमा में कितनी प्रभावी कार्रवाई करते हैं और अवैध हूटर व प्रेशर हॉर्न के इस्तेमाल पर किस तरह नियंत्रण लगाया जाता है।
हाईकोर्ट का यह रुख ध्वनि प्रदूषण की समस्या से निपटने और आम लोगों को अनावश्यक तेज आवाज से राहत दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

