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संभल में गर्मी का असर बढ़ा, 38 डिग्री तक पहुंचेगा तापमान: पिछले साल से 76 मिमी कम बारिश, धान की बुवाई पर संकट

संभल में गर्मी का असर बढ़ा, 38 डिग्री तक पहुंचेगा तापमान: पिछले साल से 76 मिमी कम बारिश, धान की बुवाई पर संकट

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में मानसून की धीमी रफ्तार और कम बारिश के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में जिले का तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। वहीं, इस साल अब तक पिछले वर्ष की तुलना में करीब 76 मिमी कम बारिश दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर कृषि कार्यों पर पड़ रहा है।

कम बारिश के चलते धान की बुवाई प्रभावित हो रही है। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने के कारण किसान परेशान हैं और उन्हें सिंचाई के लिए अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।

बारिश की कमी से किसान चिंतित

किसानों के अनुसार, धान की फसल के लिए शुरुआत में अच्छी बारिश और खेतों में पर्याप्त पानी की जरूरत होती है। लेकिन इस बार मानसून कमजोर रहने के कारण कई इलाकों में खेतों की स्थिति अनुकूल नहीं है।

पिछले साल के मुकाबले बारिश में आई कमी से धान की रोपाई में देरी हो रही है। जिन किसानों के पास सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं हैं, उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

तापमान बढ़ने से बढ़ी मुश्किलें

मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, आने वाले दिनों में संभल में अधिकतम तापमान करीब 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। गर्मी बढ़ने के कारण खेतों में नमी तेजी से खत्म हो रही है।

दिन में तेज धूप और उमस के कारण आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम में बदलाव के कारण किसानों को अब बारिश का इंतजार है।

धान की बुवाई पर पड़ रहा असर

कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि समय पर बारिश नहीं होने से धान की खेती प्रभावित हो सकती है। किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं, ताकि खेतों में पानी की उपलब्धता बढ़ सके और रोपाई का काम तेजी से शुरू हो।

कई किसान निजी संसाधनों से सिंचाई कर फसल बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इससे उनकी लागत बढ़ रही है।

मौसम पर टिकी किसानों की उम्मीद

किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय होगा और बारिश की कमी पूरी हो सकेगी। अच्छी बारिश होने से धान की बुवाई में तेजी आएगी और फसलों को भी फायदा मिलेगा।

फिलहाल संभल के किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं। कम बारिश और बढ़ते तापमान ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन और कृषि विभाग भी मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

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