'शाहजहांपुर की घटना भूल गए?' देवबंद का नाम पर बदलने पर मौलाना शहाबुद्दीन की दो टूक
उत्तर प्रदेश के देवबंद का नाम बदलने की मांग को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। इस मुद्दे पर अब इस्लामिक विद्वान Maulana Shahabuddin का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने देवबंद का नाम बदलने की मांग पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “क्या लोग शाहजहांपुर की घटना भूल गए हैं?” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है।
मौलाना शहाबुद्दीन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि किसी शहर का नाम बदलने से वहां की पहचान, इतिहास और संस्कृति को मिटाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि देवबंद सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि दुनिया भर में इस्लामिक शिक्षा और धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में बार-बार नाम बदलने की मांग उठाना समाज को बांटने की कोशिश जैसा है।
उन्होंने कहा कि देश को विकास, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, न कि शहरों और ऐतिहासिक स्थानों के नाम बदलने पर। मौलाना ने सवाल उठाते हुए कहा, “अगर नाम बदलने से सब कुछ बदल जाता, तो इतिहास की कई घटनाएं आज याद क्यों होतीं? क्या लोग शाहजहांपुर की घटना भूल गए हैं?” हालांकि उन्होंने किस विशेष घटना का जिक्र किया, इसे लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
देवबंद का नाम बदलने की मांग पिछले कुछ समय से कुछ संगठनों और नेताओं द्वारा उठाई जा रही है। उनका दावा है कि शहर का नाम बदलकर किसी ऐतिहासिक या सांस्कृतिक पहचान से जोड़ा जाना चाहिए। वहीं दूसरी ओर कई धार्मिक और सामाजिक संगठन इस मांग का विरोध कर रहे हैं।
मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि नाम बदलने की राजनीति से समाज में अनावश्यक तनाव पैदा होता है। उन्होंने लोगों से आपसी भाईचारा बनाए रखने और धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने वाली बातों से बचने की अपील की। उनका कहना है कि देश की गंगा-जमुनी तहजीब को कमजोर करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
वहीं इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कुछ नेताओं ने मौलाना के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के विवाद पैदा किए जाते हैं। दूसरी तरफ कुछ संगठनों ने नाम बदलने की मांग को सही ठहराते हुए कहा कि यह सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा मामला है।
सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड कर रहा है। लोग देवबंद के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को लेकर अपनी-अपनी राय दे रहे हैं। कुछ लोग मौलाना के बयान को संतुलित बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक टिप्पणी के रूप में देख रहे हैं।
देवबंद लंबे समय से धार्मिक शिक्षा और इस्लामिक संस्थानों के लिए जाना जाता है। यहां स्थित दारुल उलूम की पहचान देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में है। ऐसे में शहर के नाम को लेकर चल रही बहस का असर व्यापक स्तर पर दिखाई दे रहा है।
फिलहाल इस पूरे मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति और सामाजिक माहौल में नई चर्चा छेड़ दी है। आने वाले दिनों में इस पर और बयानबाजी तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

