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काशी में गणपति बप्पा की भव्य विदाई, शोभायात्रा में दिखा भक्ति और महाराष्ट्र की संस्कृति का रंग

काशी में गणपति बप्पा की भव्य विदाई, शोभायात्रा में दिखा भक्ति और महाराष्ट्र की संस्कृति का रंग

वाराणसी में शुक्रवार को गणपति बप्पा की विदाई का नजारा देखते ही बना। गणेशोत्सव के पांचवें दिन काशी मराठा समाज की ओर से आयोजित अनुष्ठान का समापन हुआ। इसके बाद लालबाग के राजा की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बना और पूरा माहौल गणपति बप्पा के जयकारों से गूंज उठा।

आसभैरो स्थित अग्रवाल भवन में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान के समापन के बाद गणपति प्रतिमा की शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। लोगों ने गणपति बप्पा के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।

शोभायात्रा में भक्ति के साथ महाराष्ट्र की पारंपरिक संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर उत्साह जताया। जगह-जगह लोगों ने शोभायात्रा का स्वागत किया और गणपति बप्पा के जयकारे लगाए।

लालबाग के राजा की शोभायात्रा के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आया। श्रद्धालु गणपति की भक्ति में सराबोर दिखाई दिए। महिलाओं, बच्चों और युवाओं ने भी बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। कई श्रद्धालु रास्तेभर गणपति के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे।

गणेशोत्सव के पांचवें दिन आयोजित इस कार्यक्रम में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक रंग भी देखने को मिला। काशी मराठा समाज की ओर से आयोजित कार्यक्रम में महाराष्ट्र की परंपराओं को काशी की धार्मिक संस्कृति के साथ जोड़ने का प्रयास नजर आया।

शोभायात्रा के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से भी इंतजाम किए गए। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मार्ग पर आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं। आयोजकों और प्रशासन की कोशिश रही कि शोभायात्रा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो।

गणपति बप्पा की विदाई के मौके पर काशी में श्रद्धालुओं के बीच भावुकता और उत्साह दोनों नजर आए। भक्तों ने अगले वर्ष फिर गणपति बप्पा के आने की कामना के साथ उन्हें विदाई दी। शोभायात्रा ने काशी की धार्मिक आस्था और महाराष्ट्र की सांस्कृतिक परंपरा का सुंदर संगम प्रस्तुत किया।

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