गोविंद गुरु विश्वविद्यालय में आठ साल बाद भी पद खाली, 1400 विद्यार्थियों की पढ़ाई अतिथि शिक्षकों पर निर्भर
बांसवाड़ा जिले में स्थित गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2017 में वागड़ अंचल के आदिवासी छात्रों को उच्च शिक्षा का अवसर देने के उद्देश्य से की गई थी। उस समय विश्वविद्यालय के लिए 30 शैक्षणिक और 40 गैर-शैक्षणिक पद स्वीकृत किए गए थे।
लेकिन स्थापना के आठ साल बाद भी ये पद भरे नहीं गए हैं। इसके परिणामस्वरूप विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले करीब 1400 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई स्थायी शिक्षकों के बजाय अतिथि शिक्षकों के भरोसे चल रही है। छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि लगातार बदलते अतिथि शिक्षक पढ़ाई की गुणवत्ता पर असर डाल रहे हैं और विद्यार्थियों के लिए दीर्घकालिक सीखने की प्रक्रिया कठिन हो गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में स्थायी और अनुभवी शिक्षकों की कमी से शिक्षण गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसके अलावा, यह समस्या विश्वविद्यालय की मूल उद्देश्य—आदिवासी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना—में बाधा डालती है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि पदों के भरने की प्रक्रिया लंबित है और सरकार से मंजूरी मिलने के बाद नियुक्तियां जल्द ही की जाएंगी।
कुल मिलाकर, गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय में आठ साल से खाली पदों की वजह से छात्रों की पढ़ाई अस्थायी व्यवस्था पर निर्भर है, जो शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के भविष्य के लिए चिंता का विषय है।

