वृंदावन के सौंदर्यीकरण किए गए घाटों की अनदेखी से फव्वारे और लाइटें हो रही हैं खराब
हृदय योजना के तहत केंद्रीय सरकार द्वारा वृंदावन के प्राचीन घाटों का सौंदर्यीकरण किया गया था, लेकिन घाटों की नियमित देखभाल न होने के कारण अब यह परियोजना लाखों रुपये की बर्बादी का रूप लेती नजर आ रही है। सौंदर्यीकरण के तहत लगाए गए फव्वारे खराब हो चुके हैं और रात को घाटों की शोभा बढ़ाने के लिए लगाई गई महंगी लाइटें केवल शोपीस बनकर रह गई हैं।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का कहना है कि घाटों पर जमा हुआ दूषित पानी और गंदगी गंभीर समस्या बन गई है। फव्वारे खराब होने से पानी का बहाव ठप है और लाइटिंग सिस्टम में खराबी के कारण रात के समय घाटों की रौनक भी प्रभावित हो रही है।
एक स्थानीय व्यापारी ने कहा, “हमने देखा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत बड़े बजट से घाटों को सजाया गया, लेकिन उनकी नियमित सफाई और रख-रखाव नहीं किया जा रहा। इसके कारण फव्वारे खराब हो रहे हैं और लाइटें काम नहीं कर रही हैं। घाटों पर जमा गंदगी से श्रद्धालुओं को परेशानी हो रही है।”
स्थानीय प्रशासन ने बताया कि हृदय योजना के तहत घाटों में फव्वारे, लाइटिंग और सजावट का काम सम्पन्न किया गया था। लेकिन इन सौंदर्यीकरण कार्यों के बाद घाटों की नियमित निगरानी और रखरखाव नहीं किया गया। इसके चलते फव्वारों में पानी जमा हो गया और लाइटें बिजली संबंधी खराबियों के कारण काम नहीं कर रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के सौंदर्यीकरण कार्यों में परियोजना के बाद रख-रखाव की योजना तैयार करना अत्यंत आवश्यक है। सिर्फ बड़े पैमाने पर निर्माण और सजावट करने से घाटों की वास्तविक सुंदरता और उपयोगिता लंबे समय तक बनी नहीं रह सकती।
श्रद्धालुओं ने भी प्रशासन से मांग की है कि घाटों की सफाई और रख-रखाव के लिए नियमित टीम नियुक्त की जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय पर ध्यान नहीं दिया गया, तो घाटों की सुंदरता परिपूर्ण होने के बजाय केवल दिखावटी और खंडित स्वरूप में रह जाएगी।
स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि दूषित पानी और गंदगी न केवल सौंदर्य को प्रभावित कर रही है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी खतरा पैदा कर रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि घाटों पर पानी का नियमित निस्तारण, लाइटिंग सिस्टम का समय-समय पर रख-रखाव और फव्वारों की सफाई सुनिश्चित की जाए।
इस प्रकार, हृदय योजना के तहत किए गए वृंदावन के घाटों का सौंदर्यीकरण अभी भी अपने उद्देश्य तक नहीं पहुंच पाया है। बड़े पैमाने पर किए गए निवेश के बावजूद फव्वारे खराब हैं, लाइटें शोपीस बन गई हैं और घाटों पर गंदगी और दूषित पानी का जमा होना स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है।
घाटों की देखभाल और नियमित रख-रखाव के लिए प्रशासनिक कदम अब अत्यंत जरूरी हो गए हैं, ताकि न केवल घाटों की सौंदर्यीकरण परियोजना का लाभ लोगों को मिल सके बल्कि यह धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी लंबे समय तक कायम रह सके।

