यूपी में 2027 की तैयारी के बीच भाजपा में गुटबाजी तेज, अयोध्या-कानपुर के बाद देवरिया में भिड़े नेता-कार्यकर्ता
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और चुनावी रणनीति तैयार करने में जुटी है। इसी बीच पार्टी के अंदर से सामने आ रही आपसी खींचतान ने नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। अयोध्या और कानपुर के बाद अब देवरिया में भाजपा के दो गुटों के बीच विवाद और मारपीट का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।
स्वागत कार्यक्रम में भिड़े भाजपा के दो गुट
देवरिया में भाजपा के सोशल मीडिया के राष्ट्रीय सह संयोजक शिवानंद द्विवेदी के स्वागत कार्यक्रम के दौरान मंगलवार को अचानक दो गुटों के बीच विवाद हो गया। देखते ही देखते कहासुनी ने मारपीट का रूप ले लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच लाठी-डंडे चलने की स्थिति बन गई। मौके पर मौजूद लोगों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन कुछ समय के लिए कार्यक्रम स्थल पर अफरातफरी का माहौल पैदा हो गया।खास बात यह है कि जिस समय यह विवाद हुआ, उस दौरान पार्टी के जिलाध्यक्ष काली प्रसाद समेत कई वरिष्ठ नेता भी मौके पर मौजूद थे। घटना के बाद पार्टी संगठन के भीतर इसे लेकर नाराजगी है।
कानपुर की घटना के बाद देवरिया ने बढ़ाई चिंता
देवरिया की घटना से कुछ दिन पहले कानपुर में भी भाजपा के नेताओं और समर्थकों के बीच विवाद सामने आया था। स्वागत कार्यक्रम के दौरान दो पक्षों के बीच कहासुनी के बाद मामला हाथापाई तक पहुंच गया था। इस घटना में जूते-चप्पल चलने की बात भी सामने आई थी। पार्टी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कमेटी गठित की थी।अब देवरिया में भी इसी तरह का विवाद सामने आने के बाद भाजपा के सामने संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।
टिकट की दावेदारी भी बन रही वजह
रिपोर्ट के मुताबिक, देवरिया में भाजपा के भीतर पिछले कुछ समय से अलग-अलग खेमों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। जिले की सातों विधानसभा सीटों पर भाजपा के विधायक हैं। ऐसे में मौजूदा विधायकों के अलावा कई नए नेता भी आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट की दावेदारी पेश कर रहे हैं। टिकट के संभावित दावेदार अपने-अपने स्तर पर राजनीतिक पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं।संगठन में पद और प्रभाव को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा भी स्थानीय स्तर पर गुटबाजी को बढ़ावा दे रही है। हालांकि हर विवाद को सीधे टिकट की राजनीति से जोड़ना जल्दबाजी होगा, लेकिन चुनाव से पहले बढ़ती खेमेबंदी पार्टी के लिए चुनौती जरूर बन सकती है।
वायरल वीडियो की जांच के बाद हो सकती है कार्रवाई
देवरिया की घटना का वीडियो पार्टी नेतृत्व तक पहुंचने की बात सामने आई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार वायरल वीडियो की जांच की जा सकती है और इसके आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई का फैसला लिया जा सकता है।भाजपा जिलाध्यक्ष काली प्रसाद ने भी कार्यक्रम के दौरान हुई घटना को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा। उन्होंने पार्टी में गुटबंदी बर्दाश्त नहीं किए जाने की बात कही।
2027 से पहले अनुशासन बड़ी चुनौती
भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में पार्टी बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को चुनावी मोर्चे पर सक्रिय करने में जुटी है। लेकिन अयोध्या, कानपुर और अब देवरिया में सामने आए विवादों ने संगठन के भीतर आपसी तालमेल और अनुशासन पर सवाल खड़े किए हैं।फिलहाल पार्टी नेतृत्व की नजर देवरिया की घटना पर है। आने वाले दिनों में संगठन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब केवल विपक्ष से मुकाबला नहीं, बल्कि अपने ही कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच बढ़ती खेमेबंदी को नियंत्रित करना भी हो सकती है।

