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सोशल मीडिया का अधिक उपयोग बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा: डॉ. विशाल सिन्हा

सोशल मीडिया का अधिक उपयोग बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा: डॉ. विशाल सिन्हा

एसएन मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल सिन्हा ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक सोशल मीडिया का उपयोग बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है। उनका कहना है कि लगातार मोबाइल और सोशल प्लेटफॉर्म पर चंद सेकंड की वीडियो रील देखने की आदत से दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर्स बिगड़ने लगते हैं।

डॉ. सिन्हा के अनुसार, इसका असर बच्चों की नींद, सीखने-समझने की क्षमता और याददाश्त पर साफ देखा जा सकता है। बच्चे अब लंबे समय तक ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं और सामान्य पढ़ाई या स्कूल की कक्षा में भी उनका मन नहीं लगता। उन्होंने बताया कि 40 मिनट की सामान्य कक्षा के दौरान बच्चों का ध्यान भटक जाता है, क्योंकि वे छोटे-छोटे डिजिटल कंटेंट के आदी हो चुके हैं।

विशेषज्ञ ने कहा कि सोशल मीडिया के लगातार उपयोग से बच्चों में धैर्य की कमी बढ़ रही है। जो कार्य पहले वे समय लेकर कर सकते थे, अब उन्हें ऊबाऊ और बोझिल लगने लगता है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि सोशल मीडिया उन्हें तुरंत संतोष और मनोरंजन देता है, जिससे लंबी अवधि की किसी गतिविधि में उनकी रुचि कम हो जाती है।

डॉ. सिन्हा ने अभिभावकों और शिक्षकों को सलाह दी कि बच्चों के मोबाइल और इंटरनेट उपयोग पर नियंत्रण रखना बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि डिजिटल डिवाइस का सीमित और नियंत्रित उपयोग बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए लाभकारी हो सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को नियमित रूप से बाहरी खेल, पढ़ाई और रचनात्मक गतिविधियों में शामिल करना चाहिए, ताकि उनका ध्यान और धैर्य विकसित हो।

साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि सोशल मीडिया की लत सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों के सामाजिक कौशल और व्यवहार को भी प्रभावित करती है। बच्चे अब बातचीत और सहयोग की गतिविधियों में कम रुचि लेने लगे हैं और अकेले डिजिटल दुनिया में अधिक समय बिताने लगे हैं।

डॉ. सिन्हा का कहना है कि माता-पिता को बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग की निगरानी करनी चाहिए। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि हर समय स्क्रीन पर ध्यान देना सही नहीं है और उन्हें सीमित समय के लिए ही डिजिटल उपकरण इस्तेमाल करने दें। उन्होंने स्कूलों को भी सुझाव दिया कि कक्षा में बच्चों की ध्यान क्षमता बढ़ाने के लिए इंटरैक्टिव और आकर्षक शिक्षण पद्धतियों को अपनाया जाए।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस समस्या पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में बच्चों में स्मृति कमजोर होना, ध्यान केंद्रित न कर पाना और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं आम हो सकती हैं। इसलिए बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए सोशल मीडिया का संतुलित उपयोग बेहद जरूरी है।

इस प्रकार, एसएन मेडिकल कॉलेज के डॉ. विशाल सिन्हा ने स्पष्ट किया कि बच्चों में सोशल मीडिया की लत गंभीर मानसिक और शैक्षणिक प्रभाव डाल रही है। माता-पिता, शिक्षक और समाज को मिलकर बच्चों के डिजिटल उपयोग पर निगरानी रखनी होगी और संतुलित डिजिटल जीवनशैली अपनाने की दिशा में कदम उठाने होंगे।

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