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यूपी बोर्ड कॉपियों के मूल्यांकन में सामने आए भावुक संदेश, छात्रों की ‘विनती भरी’ लाइनें बनी चर्चा का विषय

यूपी बोर्ड कॉपियों के मूल्यांकन में सामने आए भावुक संदेश, छात्रों की ‘विनती भरी’ लाइनें बनी चर्चा का विषय

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (UPMSP) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन इन दिनों पूरे प्रदेश में तेजी से चल रहा है। मूल्यांकन केंद्रों पर शिक्षक दिन-रात कॉपियों की जांच में जुटे हैं, लेकिन इस बार कॉपियों में लिखी गई कुछ असामान्य और भावनात्मक टिप्पणियों ने शिक्षकों का ध्यान खास तौर पर आकर्षित किया है।

जानकारी के अनुसार, कई छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं के अंत में केवल प्रश्नों के उत्तर ही नहीं लिखे, बल्कि पास होने की गुहार लगाते हुए भावुक संदेश भी जोड़ दिए हैं। कुछ छात्रों ने शिक्षक से दया दिखाने की अपील की है, तो कुछ ने पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए अच्छे अंक देने की विनती की है।

मूल्यांकन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि हर साल कुछ ऐसे मामले सामने आते हैं, लेकिन इस बार इनकी संख्या अपेक्षाकृत अधिक दिखाई दे रही है। एक शिक्षक ने बताया कि कई कॉपियों में छात्रों ने लिखा है कि “सर, इस बार पास कर दीजिए, अगली बार मेहनत करूंगा” या “घर की स्थिति ठीक नहीं है, कृपया मदद करें।” कुछ ने तो यहां तक लिखा कि “अगर पास नहीं हुए तो पढ़ाई छोड़नी पड़ेगी।”

मूल्यांकन केंद्रों पर इन संदेशों को देखकर शिक्षक कभी मुस्कुरा रहे हैं तो कभी गंभीर भी हो जा रहे हैं। शिक्षकों का मानना है कि यह छात्रों के मानसिक दबाव और परीक्षा के डर को भी दर्शाता है। साथ ही यह भी संकेत देता है कि कई छात्र परीक्षा की तैयारी को लेकर आत्मविश्वास की कमी महसूस कर रहे हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के भावुक संदेश परीक्षा प्रणाली की चुनौतियों को उजागर करते हैं। उनका मानना है कि छात्रों पर अंक और परिणाम का अत्यधिक दबाव उन्हें इस तरह की अपील लिखने के लिए मजबूर करता है। विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया है कि छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए स्कूल स्तर पर काउंसलिंग और मार्गदर्शन की व्यवस्था को और मजबूत किया जाना चाहिए।

हालांकि, बोर्ड से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन केवल उत्तरों के आधार पर ही किया जाता है और ऐसे किसी भी भावनात्मक संदेश का अंक देने की प्रक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। मूल्यांकन प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी और निर्धारित मानकों पर आधारित होती है।

इसके बावजूद, शिक्षकों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर क्यों छात्रों को इस तरह की भावनात्मक अपील लिखनी पड़ रही है। कई शिक्षकों का मानना है कि यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा के प्रति छात्रों के डर को भी दर्शाती है।

ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों से आने वाली कॉपियों में ऐसे संदेश देखने को मिले हैं, जिससे यह साफ है कि यह समस्या किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। अब शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों की नजर इस बात पर है कि भविष्य में ऐसी स्थिति को कैसे कम किया जा सकता है।

निष्कर्षतः, यूपी बोर्ड की कॉपियों में मिले ये भावुक संदेश केवल अंक बढ़ाने की अपील नहीं हैं, बल्कि यह छात्रों के मानसिक दबाव, डर और उम्मीदों का प्रतिबिंब भी हैं। यह घटना शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता को भी उजागर करती है।

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