प्रतापगढ़ में कोलकाता की मिट्टी से बन रहीं दुर्गा प्रतिमाएं, 6 महीने से चल रहा काम; 5 हजार से 65 हजार रुपये तक कीमत
शारदीय नवरात्रि को लेकर प्रतापगढ़ में दुर्गा पूजा की तैयारियां तेज हो गई हैं। मां दुर्गा की प्रतिमाओं को आकर्षक और भव्य रूप देने के लिए कारीगर कई महीनों से मेहनत कर रहे हैं। यहां कोलकाता की मिट्टी से दुर्गा प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में 10 कारीगर जुटे हुए हैं। इन मूर्तियों को बनाने का काम पिछले छह महीने से चल रहा है।
छह महीने से प्रतिमाएं बनाने में जुटे कारीगर
दुर्गा प्रतिमाओं को तैयार करना एक लंबी और मेहनत वाली प्रक्रिया है। कारीगरों को मूर्तियों का आकार देने से लेकर चेहरे की बनावट, हाथों की आकृति और बारीक सजावट तक कई चरणों में काम करना पड़ता है। प्रतिमाओं को आकर्षक रूप देने के लिए हर छोटी-बड़ी चीज पर ध्यान दिया जाता है।
कोलकाता की मिट्टी से प्रतिमाएं बनाने की परंपरा अपनी खास पहचान रखती है। इसी मिट्टी और कारीगरों की मेहनत से मां दुर्गा की प्रतिमाओं को विशेष स्वरूप दिया जा रहा है। छह महीने से जारी काम अब अंतिम चरण में पहुंच रहा है।
10 कारीगर दे रहे प्रतिमाओं को अंतिम रूप
प्रतिमाओं को तैयार करने के लिए 10 कारीगर लगातार काम कर रहे हैं। मूर्तियों को अंतिम रूप देने के दौरान उनके चेहरे के भाव, रंग-रोगन और सजावट पर विशेष ध्यान दिया जाता है। मां दुर्गा की प्रतिमा के साथ अन्य आकृतियों और सजावटी हिस्सों को भी तैयार किया जाता है।
कारीगरों की कोशिश है कि प्रतिमाएं पूजा पंडालों और श्रद्धालुओं की पसंद के अनुरूप हों। नवरात्रि और दुर्गा पूजा के दौरान इन प्रतिमाओं की मांग को देखते हुए समय पर काम पूरा करना भी जरूरी है।
5 हजार से 65 हजार रुपये तक कीमत
प्रतापगढ़ में तैयार की जा रही दुर्गा प्रतिमाओं की कीमत 5 हजार रुपये से लेकर 65 हजार रुपये तक बताई जा रही है। कीमत में अंतर प्रतिमा के आकार, बनावट, सजावट और काम की बारीकी के आधार पर हो सकता है। इससे अलग-अलग बजट वाले आयोजकों और पूजा समितियों को अपनी जरूरत के अनुसार प्रतिमा चुनने का विकल्प मिलता है।
नवरात्रि से पहले बढ़ी तैयारियां
नवरात्रि के दौरान दुर्गा पूजा पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। इसके लिए पूजा समितियां पहले से तैयारियां शुरू कर देती हैं। प्रतापगढ़ में भी प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने का काम जारी है। छह महीने की मेहनत के बाद अब कारीगरों का ध्यान मूर्तियों की फिनिशिंग और उन्हें समय पर तैयार करने पर है।
कोलकाता की मिट्टी से बन रही इन प्रतिमाओं के जरिए कारीगर अपनी कला और हुनर का प्रदर्शन कर रहे हैं। अब श्रद्धालुओं और पूजा समितियों को नवरात्रि के दौरान इन प्रतिमाओं की स्थापना का इंतजार है।

