लखनऊ में 18 साल बाद आई बाढ़ का ड्रोन VIDEO, हनुमंत धाम, शनिदेव मंदिर और रिवर फ्रंट में भरा पानी
लखनऊ में लंबे समय बाद बाढ़ ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। करीब 18 साल बाद शहर में बाढ़ जैसे हालात बने हैं। लगातार बढ़े जलस्तर के कारण गोमती नदी के आसपास के कई इलाकों में पानी भर गया है। हनुमंत धाम, शनिदेव मंदिर और रिवर फ्रंट समेत कई जगहों पर बाढ़ का पानी पहुंच गया है। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई इलाकों में लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं।
बाढ़ के हालात की तस्वीरें ड्रोन वीडियो के जरिए सामने आई हैं। इन तस्वीरों में गोमती नदी के आसपास बड़े इलाके में पानी फैला नजर आ रहा है। सामान्य दिनों में जहां लोग घूमने और धार्मिक स्थलों पर दर्शन के लिए पहुंचते हैं, वहां अब पानी जमा है। नदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की परेशानी सबसे ज्यादा बढ़ गई है।
हनुमंत धाम के आसपास भी बाढ़ का पानी भर गया है। मंदिर परिसर और उसके आसपास पानी पहुंचने से श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित हुई है। वहीं शनिदेव मंदिर के आसपास भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है। गोमती रिवर फ्रंट, जो आम दिनों में शहर के प्रमुख घूमने के स्थानों में शामिल है, वहां भी पानी फैल गया है।
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर नदी के किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों पर पड़ा है। पानी लगातार बढ़ने के कारण लोगों को घरों में सामान सुरक्षित रखने की चिंता सता रही है। कई परिवार जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर निकल रहे हैं। लोगों का कहना है कि अचानक बने बाढ़ जैसे हालात के कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों पर नजर रखी जा रही है। जलस्तर और निचले क्षेत्रों की स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है। जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए राहत और बचाव व्यवस्था भी की जा रही है। स्थानीय स्तर पर लोगों से सतर्क रहने और नदी के आसपास जाने से बचने की अपील की जा रही है।
ड्रोन से सामने आई तस्वीरों ने लखनऊ में बाढ़ की गंभीरता को साफ तौर पर दिखाया है। गोमती के बढ़े जलस्तर का असर शहर के कई प्रमुख स्थानों तक पहुंच गया है। 18 साल बाद बने इन हालात ने पुराने बाढ़ के दिनों की याद ताजा कर दी है।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। जलस्तर कम होने तक लोगों को सावधानी बरतने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है। आने वाले समय में नदी का जलस्तर और मौसम की स्थिति यह तय करेगी कि हालात कितनी जल्दी सामान्य होते हैं।

