गोरखपुर में चाय बेचकर IAS की तैयारी कर रहीं बहनों से DM ने फोन पर की बात, सोमवार को आवास पर बुलाया
गोरखपुर में चाय की दुकान चलाकर परिवार का खर्च उठाने और IAS बनने की तैयारी कर रहीं दो बहनों से रविवार को जिलाधिकारी दीपक मीणा ने फोन पर बातचीत की। दोनों बहनें पैरालाइज्ड पिता की दवाओं और घर की जरूरतों के लिए चाय बेचती हैं। बहनों की संघर्ष की कहानी सामने आने के बाद DM ने खुद फोन कर परिवार का हालचाल जाना। उन्होंने पिता की तबीयत के बारे में भी जानकारी ली और हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
जानकारी के मुताबिक, दोनों बहनें अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के साथ पढ़ाई जारी रखे हुए हैं। उनके पिता पैरालाइज्ड हैं और नियमित दवाओं की जरूरत रहती है। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के कारण बहनों ने पढ़ाई के साथ चाय बेचने का काम शुरू किया। चाय बेचकर होने वाली आमदनी से वे पिता की दवाओं और घर के खर्च में सहयोग करती हैं।
बहनों का लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में जाना और IAS अधिकारी बनना है। आर्थिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी। दिन में चाय बेचने और परिवार की जिम्मेदारियां संभालने के बाद वे अपनी पढ़ाई के लिए समय निकालती हैं। उनकी मेहनत और संघर्ष की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासन का भी ध्यान इस परिवार की ओर गया।
रविवार को DM दीपक मीणा ने बहनों से फोन पर बातचीत की। उन्होंने सबसे पहले परिवार के बारे में जानकारी ली और उनके पिता के स्वास्थ्य का हाल पूछा। बातचीत के दौरान उन्होंने बहनों की पढ़ाई और भविष्य की योजनाओं के बारे में भी जानकारी ली। DM ने उन्हें भरोसा दिलाया कि प्रशासन की ओर से परिवार की हर संभव मदद की जाएगी।
इसके बाद जिलाधिकारी ने दोनों बहनों को सोमवार सुबह 10 बजे अपने आवास पर मिलने के लिए बुलाया है। माना जा रहा है कि मुलाकात के दौरान परिवार की आर्थिक स्थिति, पिता के इलाज और बहनों की पढ़ाई से संबंधित जरूरतों पर विस्तार से चर्चा होगी। प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई जा सकने वाली मदद को लेकर भी बातचीत हो सकती है।
बहनों के लिए यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद अपने सपने को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत कर रही हैं। पिता की बीमारी और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने चाय बेचने को अपनी मजबूरी बनने नहीं दिया, बल्कि पढ़ाई जारी रखने का रास्ता चुना।
DM की ओर से मदद का आश्वासन मिलने के बाद परिवार को भी राहत की उम्मीद जगी है। सोमवार को होने वाली मुलाकात में प्रशासन की ओर से किस तरह की सहायता उपलब्ध कराई जाती है, यह सामने आएगा।
फिलहाल जिलाधिकारी के फोन के बाद दोनों बहनों को उम्मीद है कि उनके परिवार की समस्याओं का समाधान निकालने में प्रशासन सहयोग करेगा। वहीं, उनकी कहानी आर्थिक चुनौतियों के बीच शिक्षा और अपने लक्ष्य के लिए संघर्ष करने वाले युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
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