Samachar Nama
×

याचिका पर गहराया विवाद: ताजमहल मकबरा नहीं बल्कि महादेव नागनाथेश्वर का तेजोमहालय मंदिर!

आगरा। केंद्र और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से दाखिल प्रतिवाद पत्र के बाद ताजमहल मंदिर है या मकबरा इसे लेकर मामला उलझता नजर आ रहा है। अपर सिविल जज थर्ड सीनियर डिवीजन कोर्ट में दाखिल किए गए इस प्रतिवाद में उल्लेख किया गया है कि जयुपर के राजा जय सिंह की जमीन हड़पी
याचिका पर गहराया विवाद: ताजमहल मकबरा नहीं बल्कि महादेव नागनाथेश्वर का तेजोमहालय मंदिर!

आगरा। केंद्र और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से दाखिल प्रतिवाद पत्र के बाद ताजमहल मंदिर है या मकबरा इसे लेकर मामला उलझता नजर आ रहा है। अपर सिविल जज थर्ड सीनियर डिवीजन कोर्ट में दाखिल किए गए इस प्रतिवाद में उल्लेख किया गया है कि जयुपर के राजा जय सिंह की जमीन हड़पी नहीं गई थी बल्कि सं​पत्ति का आदान—प्रदान हुआ था।

याचिकाकर्ताओं का कहना—

साल 2015 में लखनऊ के हरीशंकर जैन और अन्य ने सिविल कोर्ट में एक याचिका दायर की है जिसमें ताजमहल को भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजोमहालय मंदिर घोषित किया गया है।

केंद्र व भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का कहना—

गुरूवार को केंद्र और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने अपने प्रतिवाद पत्र में कहा है कि ताजमहल में कोई मंदिर या शिवलिंग नहीं है। एएसआई ने यह तथ्य साल 1195 के बटेश्वर शिलालेख के आधार पर कहा है क्यों कि इस शिलालेख में ताजमहल में कोई मंदिर या शिवलिंग या फिर तेजोमहालय होने की बात से इनकार किया गया है।

हां इस शिलालेख में ये स्वीकार किया गया है ​कि बादशाह शाहजहां ने राजा जय सिहं की संपत्ति हड़पी नहीं थी बल्कि इसके बदले में जय सिहं को संपत्ति दी गई थी। पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने दायर याचिका में उपलब्ध रिकॉर्ड और सूचनाओं के आधार पर कहा है कि ताजमहल को शाहजहां ने अर्जुमंद बानो बेगम की याद में बनवाया था।

वादी पक्ष के अधिवक्ता का बयान—

वादी पक्ष के अधिवक्ता राजेश कुलश्रेष्ठ का कहना है कि कम से कम प्रतिवाद पत्र में इस बात को तो स्वीकार कर लिया गया है कि यह राजा जय सिंह की संपत्ति थी। कुलश्रेष्ठ ने कहा कि वादी पक्ष का भी यही मानना है कि यह मंदिर था और राजा जयसिंह से शाहजहां ने इसे छीना था। ताजमहल में आज भी भगवान शिव विराजमान हैं। वादी पक्ष का यह भी कहना है कि दुनिया में किसी मकबरे के साथ महल शब्द नहीं जुड़ा है। आज भी ताजमहल में बूंद—बूंद पानी गिरता है, आज तक किसी मकबरे में बूंद—बूंद पानी टपकने की व्यवस्था का उल्लेख नहीं है।

जयपुर सिटी पैलेस में ताजमहल से जुड़़े दस्तावेज—

राजस्थान के जयपुर स्थित सिटी पैलेस संग्रहालय में इस बात का उल्लेख है कि ताजमहल राजमान सिंह से जुड़ा है।
17 दिसंबर 1633 में शाहजहां ने राजा मान सिंह की हवेली के बदले चार हवेलियां दी थी जिसमें राजा भगवान दास की हवेली, राजा माधा सिंह की हवेली, रूपसी बैरागी की हवेली और चांद सिंह पुत्र सूरज सिंह की हवेलियों का उल्लेख है।

क्या कहता है बटेश्वर शिलालेख—

लखनऊ संग्रहालय में रखे वर्ष 1195 के इस बटेश्वर शिलालेख दो फुट चौड़ा और एक फुट आठ इंच उंचा है। इस शिलालेख पर नागरी लिपि के संस्कृत में कुल 24 श्लोक लिखे गए हैं जिसमें राजा परमार्दिदेव के मंत्री सलक्षणा द्वारा भव्य वैष्णव व शैव मंदिर बनवाने का जिक्र है। हांलाकि जगह के बारे में कुछ भी नहीं लिखा गया है। यह बटेश्वर शिलालेख सन 1888 में मिला था। जबकि इतिहासकार स्व. पीएन ओक ने अपनी पुस्तक में इस शिलालेख में ​वर्णित शिवमंदिर को ही ताजमहल बताया है।

इतिहास और राजनीति से जुड़ी खबरों की लेटेस्ट जानकारी पाएं

हमारे FB पेज पे. अभी LIKE करें – समाचारनामा

Share this story