राम मंदिर चढ़ावा मामले में हाई कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार, स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिका पर नहीं मिली राहत
उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित Ram Mandir Ayodhya में चढ़ावे की कथित चोरी और अनियमितताओं के आरोपों को लेकर दायर याचिका पर हाई कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। याचिकाकर्ता Mohit Ashok ने मंदिर में प्राप्त दान राशि और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की थी।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि राम मंदिर को श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे के प्रबंधन में अनियमितताएं हुई हैं, जिनकी निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए।
स्वतंत्र जांच की मांग
याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया था कि मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वतंत्र जांच के आदेश दिए जाएं। उनका कहना था कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
याचिका में यह भी कहा गया कि यदि आरोपों में सच्चाई है तो दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
हाई कोर्ट ने तत्काल राहत देने से किया इनकार
मामले पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिका पर तुरंत सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की और फिलहाल कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया।
हालांकि अदालत की ओर से मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की गई है। आगे की कानूनी प्रक्रिया नियमानुसार जारी रह सकती है।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि के प्रबंधन को लेकर हाल के दिनों में विभिन्न स्तरों पर सवाल उठे हैं। इसी बीच कुछ कर्मचारियों को ड्यूटी से हटाने और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने जैसे कदम भी सामने आए थे।
मंदिर प्रबंधन से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से भी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं।
आस्था से जुड़ा संवेदनशील मामला
अयोध्या का राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे और दान राशि के प्रबंधन से जुड़ा कोई भी विवाद स्वाभाविक रूप से व्यापक चर्चा का विषय बन जाता है।
फिलहाल हाई कोर्ट द्वारा तत्काल सुनवाई से इनकार किए जाने के बाद मामले की आगे की कानूनी दिशा पर सभी की नजर बनी हुई है। वहीं, याचिकाकर्ता आगे उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।

