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नेपाल से आई बहुएं भारत में मतदाता नहीं बन सकतीं, बच्चों को मिलेगा नागरिकता अधिकार

नेपाल से आई बहुएं भारत में मतदाता नहीं बन सकतीं, बच्चों को मिलेगा नागरिकता अधिकार

नेपाल से भारत में शादी करके आई बहुओं को भारत में मतदाता बनने का अधिकार नहीं है। सरकारी नियमों के अनुसार, मतदाता सूची में नाम दर्ज करवाने के लिए किसी भी व्यक्ति को भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है। इसका अर्थ यह है कि भले ही वे बहुएं भारत की वैध निवासी हों और यहां वर्षों से रह रही हों, उन्हें भारत में जनप्रतिनिधियों को चुनने का अधिकार नहीं मिलेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह नियम देश की नागरिकता नीति के अनुरूप है। मतदाता सूची में शामिल होने के लिए नागरिकता आवश्यक शर्त है, ताकि मतदान प्रक्रिया में केवल वही लोग भाग लें जो कानूनी रूप से देश के नागरिक हैं। नेपाल से आई बहुओं को भारतीय नागरिक बनने के लिए पहले भारतीय नागरिकता अधिनियम की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसमें आवेदन, प्रमाण-पत्र और कुछ वर्षों तक भारत में स्थायी निवास जैसे मानक शामिल हैं।

हालांकि, इस मामले में एक महत्वपूर्ण छूट भी है। तय मानकों को पूरा करने वाले दंपतियों के बच्चे भारतीय नागरिक माने जाएंगे। इसका मतलब है कि नेपाल से आई बहुओं के बच्चे जन्म के समय ही भारतीय नागरिकता के हकदार होंगे, यदि वे भारत में जन्मे हैं और माता-पिता भारतीय नागरिकता संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। इसके बाद बच्चों का नाम मतदाता सूची में शामिल कराया जा सकता है और वे भविष्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे।

सांख्यिकी और सामाजिक अध्ययन बताते हैं कि भारत में नेपाल से आई बहुएं अक्सर उत्तर भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहती हैं। ये महिलाएं स्थानीय समाज और परिवारों का हिस्सा बन चुकी हैं, लेकिन फिर भी मतदाता अधिकार से वंचित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति नागरिकता और मताधिकार के बीच मौजूद अंतर को उजागर करती है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि भले ही बच्चों को नागरिकता मिलने की गारंटी है, लेकिन माताओं को मतदान के अधिकार से वंचित करना कई बार परिवार और समाज में असंतोष उत्पन्न करता है। उनका सुझाव है कि नागरिकता प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए ताकि वैध निवासियों को कानूनी और लोकतांत्रिक अधिकारों का पूरा लाभ मिल सके।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारत में नागरिकता और मतदाता सूची संबंधी नियम संविधान और चुनाव आयोग की गाइडलाइन के अनुसार बनाए गए हैं। इन नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में केवल देश के नागरिक ही भाग लें। इसी वजह से नेपाल या अन्य देशों से आई बहुएं, जब तक वे नागरिकता नहीं लेतीं, मतदान में भाग नहीं ले सकतीं।

इस नियम के चलते कई बहुएं और उनके परिवार सामाजिक और राजनीतिक रूप से सीमित अनुभव करती हैं। हालांकि, बच्चों के भारतीय नागरिक होने से उन्हें भविष्य में मतदान और जनप्रतिनिधि चुनने का अधिकार प्राप्त होगा। यह स्थिति परिवारों को आश्वस्त करती है कि उनके बच्चे भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे।

इस प्रकार, नेपाल से आई बहुओं के मामले में मतदाता अधिकार और नागरिकता की शर्तें स्पष्ट रूप से अलग रखी गई हैं। जबकि बहुएं स्वयं मतदान नहीं कर सकतीं, उनके बच्चों के लिए यह अधिकार सुरक्षित है। विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता लगातार नागरिकता प्रक्रिया को सरल बनाने और वैध निवासियों के अधिकारों के मुद्दे पर ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।

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