टैरिफ से जूझती लेदर इंडस्ट्री को कस्टम नियमों और विदेशी निवेश में राहत, खुलेंगे रोजगार के नए अवसर
अमेरिकी टैरिफ की बढ़ती चुनौतियों के बीच केंद्रीय बजट ने उत्तर प्रदेश की लेदर इंडस्ट्री को आंशिक राहत देकर नई उम्मीद जगाई है। बजट में एमएसएमई को बढ़ावा, कस्टम नियमों में सरलीकरण, डिजाइन डेवलपमेंट और विदेशी निवेश को प्रोत्साहन जैसे फैसलों से प्रदेश के लेदर कारोबार को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
लेदर उद्योग लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में टैरिफ और बढ़ती लागत के दबाव से जूझ रहा था। खासकर अमेरिका और यूरोपीय देशों में निर्यात प्रभावित होने से छोटे और मझोले निर्यातकों पर संकट गहरा गया था। ऐसे में बजट में घोषित रियायतों को उद्योग के लिए “राहत की सांस” माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, कस्टम प्रक्रियाओं को सरल बनाने और आयात-निर्यात नियमों में ढील से कच्चे माल की उपलब्धता आसान होगी, जिससे उत्पादन लागत घटेगी। वहीं डिजाइन और तकनीकी उन्नयन पर जोर देने से उत्पादों की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
विदेशी निवेश को आकर्षित करने के फैसलों से कानपुर, उन्नाव और आगरा जैसे प्रमुख लेदर हब में नए प्रोजेक्ट लगने की संभावना है। उद्योग संगठनों का अनुमान है कि इन प्रावधानों के चलते अगले तीन वर्षों में उत्तर प्रदेश के लेदर बाजार में करीब 5000 करोड़ रुपये का कारोबार बढ़ सकता है, जबकि लगभग 3000 करोड़ रुपये का नया विदेशी निवेश भी आ सकता है। इससे हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। खासकर एमएसएमई इकाइयों को सीधे लाभ मिलेगा, जो प्रदेश में लेदर उत्पादन और निर्यात का बड़ा हिस्सा संभालती हैं।
हालांकि उद्योग जगत का कहना है कि कुछ अहम मांगें—जैसे निर्यात प्रोत्साहन पैकेज और टैक्स में अतिरिक्त राहत—अब भी लंबित हैं। कुल मिलाकर, बजट के प्रावधान टैरिफ दबाव से जूझ रही लेदर इंडस्ट्री के लिए नई ऊर्जा का काम कर सकते हैं और उत्तर प्रदेश को एक बार फिर देश के प्रमुख लेदर निर्यात केंद्र के रूप में मजबूती दे सकते हैं।

