वाराणसी में पितरों का तर्पण करने उमड़ी भीड़, अमेरिका से चाचा की अस्थियां लेकर पहुंचे जैक्सन
वाराणसी में इन दिनों पितरों के तर्पण और पिंडदान के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। शनिवार को अमेरिका से जैक्सन अपने दिवंगत चाचा नेट की अस्थियां लेकर वाराणसी पहुंचे। उन्होंने अस्सी घाट पर धार्मिक विधि-विधान के साथ चाचा की अस्थियों का विसर्जन कराया और उनकी आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। इस दौरान घाट पर पुरोहितों ने मंत्रोच्चार के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया।
मान्यता के अनुसार, वाराणसी में गंगा तट पर पितरों का तर्पण, पिंडदान और अस्थि विसर्जन करने का विशेष महत्व माना जाता है। इसी आस्था के चलते बड़ी संख्या में लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए काशी पहुंचते हैं। पितृ पक्ष के दौरान घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दे रही है।
जैक्सन भी अपने दिवंगत चाचा नेट की अंतिम इच्छा और उनकी आत्मा की शांति के लिए अमेरिका से अस्थियां लेकर काशी पहुंचे। शनिवार को वह अस्सी घाट पहुंचे, जहां पुरोहितों की मौजूदगी में उन्होंने पूजा-अर्चना की। इसके बाद गंगा में विधि-विधान से अस्थि विसर्जन कराया गया। पिंडदान की प्रक्रिया भी पूरी की गई।
धार्मिक अनुष्ठान के दौरान जैक्सन ने अपने दिवंगत चाचा को याद किया। पुरोहितों ने मंत्रोच्चार के साथ तर्पण और पिंडदान की प्रक्रिया पूरी कराई। अस्थि विसर्जन के बाद जैक्सन ने गंगा तट पर पूजा की और चाचा की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
काशी में पितरों के तर्पण के लिए इन दिनों अलग-अलग राज्यों के साथ विदेशों से भी लोग पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि गंगा में अस्थि विसर्जन और पितरों के निमित्त किए जाने वाले धार्मिक कर्मकांड से उन्हें आध्यात्मिक शांति मिलती है। इसी विश्वास के कारण लोग लंबी दूरी तय कर वाराणसी आते हैं।
अस्सी घाट समेत वाराणसी के प्रमुख घाटों पर पिंडदान और तर्पण कराने के लिए पुरोहितों की मौजूदगी रहती है। श्रद्धालु अपनी परंपरा और मान्यताओं के अनुसार कर्मकांड कराते हैं। पितृ पक्ष के दौरान घाटों पर विशेष रूप से धार्मिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं।
अमेरिका से चाचा की अस्थियां लेकर वाराणसी पहुंचे जैक्सन का मामला भी इसी आस्था और पारिवारिक परंपरा से जुड़ा है। विदेश में रहने के बावजूद उन्होंने अपने दिवंगत चाचा के लिए काशी पहुंचकर धार्मिक विधि पूरी कराई।
वाराणसी में देश-विदेश से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। घाटों पर तर्पण, पिंडदान और अस्थि विसर्जन के चलते धार्मिक माहौल बना हुआ है। श्रद्धालु अपने पूर्वजों की स्मृति में अनुष्ठान कर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

