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ताजमहल के रॉयल गेट में दरारें, वीडियो में जाने संरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

ताजमहल के रॉयल गेट में दरारें, वीडियो में जाने संरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल, जो अपनी भव्यता और नायाब स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है, अब संरचनात्मक क्षति को लेकर सुर्खियों में है। करीब 373 साल पुराने इस ऐतिहासिक स्मारक के रॉयल गेट की स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं, जहां अब पत्थरों में दरारें और ढीलापन देखा जा रहा है।स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, रॉयल गेट की दीवारों में कई जगह बड़ी और छोटी दरारें उभर आई हैं। कुछ पत्थर अपनी मूल जग से खिसक भी चुके हैं, जिससे संरचना की मजबूती पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थिति इतनी गंभीर बताई जा रही है कि यह ऐतिहासिक प्रवेश द्वार अब तेज आंधी और बारिश का सामना करने में भी कमजोर साबित हो रहा है।

पिछले महीने तेज आंधी-बारिश के दौरान दो बार गेट के पत्थर टूटकर नीचे गिरने की घटनाएं भी सामने आई हैं। सौभाग्य से इन घटनाओं में कोई पर्यटक घायल नहीं हुआ, लेकिन कई बार पर्यटकों की जान बाल-बाल बचने की बात सामने आई है। इससे सुरक्षा व्यवस्था और संरचनात्मक निगरानी पर सवाल उठने लगे हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि समय के साथ-साथ प्राकृतिक प्रभाव, मौसम में बदलाव और लगातार बढ़ते पर्यटक दबाव के कारण ऐतिहासिक इमारतों की संरचना पर असर पड़ रहा है। ताजमहल के विभिन्न हिस्सों में पहले भी पत्थरों के गिरने और जालियों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, ताजमहल परिसर के अन्य हिस्सों में भी नुकसान देखा गया है। मुख्य मकबरे के पीछे यमुना नदी की ओर लगी जालीदार रेलिंग तेज बारिश और हवाओं को झेल नहीं पाई, जिससे उसमें भी क्षति पहुंची है। इससे स्मारक की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर चिंता और बढ़ गई है।भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा समय-समय पर मरम्मत और संरक्षण कार्य किए जाते हैं, लेकिन लगातार हो रहे नुकसान ने एक बार फिर दीर्घकालिक संरक्षण योजना की आवश्यकता को उजागर कर दिया है।

पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि ताजमहल जैसे विश्व धरोहर स्थल की सुरक्षा केवल मरम्मत तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसके लिए वैज्ञानिक और आधुनिक संरक्षण तकनीकों का इस्तेमाल भी जरूरी है। फिलहाल, इस स्थिति को लेकर प्रशासन और संरक्षण एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है कि वे ताजमहल की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर तत्काल और ठोस कदम उठाएं, ताकि इस ऐतिहासिक धरोहर को भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जा सके।

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