उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर रिपोर्ट पर विवाद, समिति ने बताया ‘सटीक’, पुराने आंकड़ों से उठे सवाल
उत्तर प्रदेश में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों की विश्वसनीयता को लेकर चल रही बहस के बीच गठित चार सदस्यीय जांच समिति ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट में स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली और डेटा रिकॉर्डिंग को “सटीक” बताया गया है। हालांकि, इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद बिजली कंपनियों के पुराने आंकड़ों ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे पूरे मामले पर विवाद गहराता दिखाई दे रहा है।
जानकारी के अनुसार, राज्य में बिजली उपभोक्ताओं के घरों में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों को लेकर लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। उपभोक्ताओं का आरोप था कि इन मीटरों में खपत से अधिक बिलिंग हो रही है, जिससे बिजली बिल अचानक बढ़ गए हैं। इन शिकायतों के बाद सरकार ने स्थिति की जांच के लिए एक चार सदस्यीय समिति का गठन किया था।
समिति ने कई जिलों में जाकर स्मार्ट मीटरों के कामकाज, डेटा ट्रांसमिशन और बिलिंग प्रक्रिया की जांच की। अंतरिम रिपोर्ट में कहा गया है कि तकनीकी रूप से स्मार्ट मीटरों में कोई बड़ी खामी नहीं पाई गई है और वे बिजली खपत को लगभग सटीक रूप से रिकॉर्ड कर रहे हैं। समिति के अनुसार, मीटरों में उपयोग की जा रही तकनीक अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है।
हालांकि, इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद विवाद तब बढ़ गया जब बिजली वितरण कंपनियों द्वारा पहले जारी किए गए कुछ पुराने आंकड़ों और उपभोक्ता बिलों की तुलना सामने आई। इन आंकड़ों में कई ऐसे मामले पाए गए हैं, जहां समान खपत के बावजूद अलग-अलग समय पर बिलों में बड़ा अंतर देखा गया था। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या वास्तव में मीटरिंग प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी है या कहीं न कहीं डेटा प्रोसेसिंग में गड़बड़ी हो रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल मीटर की तकनीकी जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि बिलिंग सिस्टम, डेटा ट्रांसफर और सॉफ्टवेयर प्रोसेसिंग की भी गहन जांच आवश्यक है। उनका मानना है कि अगर इन प्रक्रियाओं में कोई तकनीकी या मानव त्रुटि होती है, तो उसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
वहीं, बिजली विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर प्रणाली को पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से लागू किया गया है। उनका दावा है कि यह तकनीक पारंपरिक मीटरों की तुलना में अधिक विश्वसनीय है और इसमें छेड़छाड़ की संभावना बेहद कम होती है।
उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था का आधुनिकीकरण करने के लिए पिछले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं। सरकार का उद्देश्य है कि इससे बिजली चोरी पर रोक लगे और वास्तविक खपत के आधार पर बिलिंग सुनिश्चित की जा सके।
हालांकि, उपभोक्ताओं के बीच बढ़ती असंतोष की भावना और पुराने आंकड़ों में सामने आई विसंगतियों ने इस पूरे प्रोजेक्ट की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें सरकार की अंतिम रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।
फिलहाल, यह मामला उत्तर प्रदेश में स्मार्ट बिजली मीटर प्रणाली को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस का रूप ले चुका है, जिसमें तकनीकी भरोसे और उपभोक्ता अनुभव के बीच संतुलन बनाने की चुनौती सामने आ रही है।

