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राम मंदिर बयान पर बढ़ा विवाद: विहिप महासचिव ने शंकराचार्य को बताया ‘कालनेमि’, बोले- संत नहीं ‘कांग्रेसाचार्य’ और ‘सपाचार्य’

राम मंदिर बयान पर बढ़ा विवाद: विहिप महासचिव ने शंकराचार्य को बताया ‘कालनेमि’, बोले- संत नहीं ‘कांग्रेसाचार्य’ और ‘सपाचार्य’

अयोध्या में बन रहे राम मंदिर को लेकर दिए गए एक बयान के बाद धार्मिक और राजनीतिक हलकों में विवाद बढ़ गया है। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय महासचिव ने एक कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें ‘कालनेमि’ राक्षस तक कह दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग संत की भूमिका में रहकर हिंदू समाज को भ्रमित करने का काम कर रहे हैं।

रायबरेली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान विहिप के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि राम मंदिर को भाजपा और आरएसएस का कार्यालय बताने वाला बयान पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है और इसे किसी राजनीतिक दल या संगठन से जोड़ना उचित नहीं है।

विहिप नेता ने शंकराचार्य पर निशाना साधते हुए कहा कि वे संत नहीं बल्कि ‘कांग्रेसाचार्य’ और ‘सपाचार्य’ की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक हितों को ध्यान में रखकर धार्मिक मुद्दों पर बयान दिए जा रहे हैं। हालांकि, उनके इस बयान पर संत समाज और अन्य लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि भगवान राम का मंदिर किसी एक दल या संगठन की संपत्ति नहीं है, बल्कि यह देश और दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। उन्होंने मंदिर निर्माण के लिए हुए लंबे संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि यह आंदोलन समाज की भावना से जुड़ा हुआ था।

गौरतलब है कि राम मंदिर को लेकर समय-समय पर अलग-अलग नेताओं और संतों के बयान सामने आते रहे हैं। मंदिर निर्माण और उसके राजनीतिक संदर्भ को लेकर कई बार बहस भी छिड़ चुकी है। हाल ही में दिए गए बयान के बाद एक बार फिर इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है।

विहिप महासचिव ने अपने संबोधन में हिंदू समाज से एकजुट रहने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि धार्मिक मुद्दों पर भ्रम फैलाने वाले बयानों से बचना चाहिए और समाज को तथ्यों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।

वहीं, इस बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्षी दलों और संत समाज की ओर से इस पर प्रतिक्रिया आने की संभावना है। फिलहाल राम मंदिर को लेकर जारी बयानबाजी ने एक बार फिर राजनीतिक बहस को हवा दे दी है।

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