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करंट लगने से संविदाकर्मी की मौत, जांच के लिए तीन अभियंताओं की कमेटी गठित

करंट लगने से संविदाकर्मी की मौत, जांच के लिए तीन अभियंताओं की कमेटी गठित

जिले के मोहनलालपुर इलाके में एक दुखद घटना में संविदाकर्मी राजू उर्फ मो. सलीम की करंट लगने से मौत हो गई। घटना उस समय हुई जब वह ट्रांसफार्मर ठीक करने के लिए काम कर रहे थे और शटडाउन (विद्युत अवरोध) नहीं लिया गया था।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हादसा तत्काल करंट की चपेट में आने से हुआ। मौके पर मौजूद लोग मदद के लिए दौड़े, लेकिन संविदाकर्मी की स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। इस घटना ने इलाके में सन्नाटा और चिंता पैदा कर दी है।

घटना के बाद प्रशासन ने तीन अभियंताओं की कमेटी गठित की है, जो इस मामले की गहन जांच करेगी। कमेटी हादसे के कारणों, सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन, और शटडाउन न लेने के पीछे के तर्क का विश्लेषण करेगी।

विद्युत मजदूर संगठनों ने इस घटना को लेकर सख्त प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने मृतक के परिजनों के लिए 10 लाख रुपये मुआवजा देने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। संगठन ने कहा कि इस तरह की लापरवाही कर्मचारियों की जान को खतरे में डालती है और इसे प्रशासन नजरअंदाज नहीं कर सकता।

विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रांसफार्मर या हाई-टेंशन लाइन में काम करते समय शटडाउन और सुरक्षा उपकरणों का पालन बेहद जरूरी है। अगर नियमों का पालन नहीं किया जाता है, तो इस प्रकार के घातक हादसे होना स्वाभाविक है।

स्थानीय अधिकारी भी मानते हैं कि इस घटना ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर किया है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए सख्त सुरक्षा नियम लागू किए जाएंगे।

मृतक संविदाकर्मी के परिजन और पड़ोसी अभी भी हादसे के सदमे में हैं। उनका कहना है कि उन्हें इस तरह की दुर्घटना की पूरी जानकारी और मुआवजे की उचित प्रक्रिया की उम्मीद है। वहीं, प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध होगी।

घटना ने गोरखपुर में विद्युत सुरक्षा और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरणों और सावधानी के नियमों का नियमित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों से बचा जा सके।

इस घटना ने प्रशासन और विद्युत विभाग दोनों के लिए सुरक्षा मानकों पर पुनर्विचार की आवश्यकता को स्पष्ट कर दिया है। मृतक के परिवार और मजदूर संगठन प्रशासन से तेजी से न्याय और जवाबदेही की उम्मीद कर रहे हैं।

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