उत्तराखंड कांग्रेस में विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर अंदरूनी खींचतान का मामला सामने आया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की ओर से निकाली जा रही धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा पर कांग्रेस हाईकमान ने रोक लगाने को कहा है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि प्रदेश संगठन से चर्चा और अनुमति के बिना इस तरह का अलग कार्यक्रम आयोजित करना उचित नहीं है। मामले को लेकर हरीश रावत को दिल्ली तलब किया गया है।
दरअसल, हरीश रावत पिछले दिनों से उत्तराखंड के अलग-अलग इलाकों में धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा कर रहे हैं। हरिद्वार में उनकी यात्रा के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने जगह-जगह उनका स्वागत किया था। इसके बाद रावत ने आगे भी कई क्षेत्रों में यात्रा का कार्यक्रम जारी किया। इसी को लेकर पार्टी संगठन में आपत्ति सामने आई।
प्रदेश प्रभारी ने जताई नाराजगी
कांग्रेस की उत्तराखंड प्रभारी और महासचिव कुमारी शैलजा ने हरीश रावत को पत्र लिखकर यात्रा और अन्य कार्यक्रमों को आगे नहीं बढ़ाने का आग्रह किया। रिपोर्टों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व की नाराजगी की मुख्य वजह यह है कि यात्रा को लेकर प्रदेश संगठन और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से पहले चर्चा नहीं की गई थी। पार्टी का कहना है कि चुनावी तैयारियों के बीच सभी बड़े कार्यक्रम संगठन के समन्वय से होने चाहिए।
शैलजा के पत्र में यह भी कहा गया कि अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं और ऐसे समय में पार्टी के भीतर एकजुटता जरूरी है। कांग्रेस नेतृत्व के मुताबिक, प्रदेश कांग्रेस के समानांतर कोई अलग राजनीतिक कार्यक्रम चलाने से संगठन के स्तर पर समन्वय प्रभावित हो सकता है।
केसी वेणुगोपाल ने दिल्ली बुलाया
मामले के बीच कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने हरीश रावत को दिल्ली बुलाया है। रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली में उनसे पार्टी संगठन के साथ मिलकर काम करने और व्यक्तिगत स्तर पर अलग यात्राओं के बजाय पार्टी के दायरे में रहकर राजनीतिक गतिविधियां करने को कहा जा सकता है।
हरीश रावत की ओर से अपनी यात्रा को लेकर कहा गया है कि इसका उद्देश्य किसी समानांतर संगठन या व्यवस्था को खड़ा करना नहीं है। उनका कहना है कि वह जनता से संवाद करना और पार्टी-संगठन को मजबूत करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह पार्टी नेतृत्व और संगठन के अनुशासन के प्रति प्रतिबद्ध रहे हैं।
यात्रा को लेकर बढ़ी राजनीतिक चर्चा
हरिद्वार में यात्रा के दौरान रावत का समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया था। उनके काफिले में ‘टाइगर इज बैक’ जैसे पोस्टर भी नजर आए थे, जिससे उनकी राजनीतिक सक्रियता को लेकर चर्चा तेज हुई। रावत ने यात्रा को जनता के प्रति आभार जताने और उनसे सीधे संवाद का माध्यम बताया था।
अब हरीश रावत के दिल्ली दौरे पर सबकी नजर है। बैठक में उनकी ओर से क्या जवाब दिया जाता है और इसके बाद कांग्रेस नेतृत्व यात्रा को लेकर क्या फैसला करता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल इस घटनाक्रम ने उत्तराखंड कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

