मेरठ में प्रतियोगी छात्र ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में नशे की लत को बताया जिम्मेदार
जिले के टीपीनगर थाना क्षेत्र से एक बेहद दुखद और चिंताजनक मामला सामने आया है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे एक छात्र ने नशे की लत से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद इलाके में शोक की लहर है और परिजन सदमे में हैं।
जानकारी के मुताबिक, छात्र पिछले कुछ समय से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। परिवार वालों का कहना है कि वह पढ़ाई को लेकर गंभीर था, लेकिन धीरे-धीरे वह नशे की गिरफ्त में आ गया, जिससे उसकी मानसिक स्थिति प्रभावित होने लगी थी। कई बार परिजनों ने उसे समझाने और इस आदत से दूर रखने की कोशिश भी की, लेकिन स्थिति में खास सुधार नहीं हो पाया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। कमरे की तलाशी के दौरान पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है।
पुलिस के अनुसार, छात्र ने सुसाइड नोट में अपनी मौत का जिम्मेदार खुद की नशे की लत को बताया है। उसने लिखा कि वह इस आदत से बाहर नहीं निकल पा रहा था और मानसिक तनाव से जूझ रहा था। नोट में किसी अन्य व्यक्ति को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।
टीपीनगर थाना प्रभारी ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का लग रहा है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। मामले में आगे की कार्रवाई पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति और मानसिक तनाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों पर पहले से ही पढ़ाई और भविष्य का दबाव रहता है। ऐसे में अगर वे नशे की ओर मुड़ते हैं तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
मनोचिकित्सकों का मानना है कि परिवार और समाज को युवाओं के व्यवहार में बदलाव पर ध्यान देना चाहिए। समय पर काउंसलिंग और समर्थन मिलने से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इलाके में नशे के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जाए, ताकि युवा इसकी चपेट में न आएं।
यह घटना न केवल एक परिवार के लिए त्रासदी है, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है कि युवाओं की मानसिक सेहत और नशामुक्त वातावरण पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।

