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कोविड से मौत पर RT-PCR रिपोर्ट न होने से मुआवजा नहीं रोक सकते, इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश; पत्नी को मिलेंगे 50 लाख रुपये

कोविड से मौत पर RT-PCR रिपोर्ट न होने से मुआवजा नहीं रोक सकते, इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश; पत्नी को मिलेंगे 50 लाख रुपये

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोविड-19 से मौत के मामले में मुआवजे को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल अलग से आरटी-पीसीआर रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने के आधार पर पीड़ित परिवार को मुआवजा देने से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड में एंटीजन जांच पॉजिटिव होने और कोविड-19 से मौत की पुष्टि दर्ज है, तो इन दस्तावेजों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने सोनभद्र के जिलाधिकारी की ओर से मुआवजा देने से इनकार करने के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही मृतक की पत्नी को 50 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता देने का निर्देश दिया है। अदालत ने संबंधित राशि का भुगतान करने के लिए आठ सप्ताह की समयसीमा निर्धारित की है।

आरटी-पीसीआर रिपोर्ट की अलग प्रति नहीं होना मुआवजा रोकने का आधार नहीं

मामले में मुआवजा देने से इनकार किए जाने का आधार आरटी-पीसीआर रिपोर्ट की अलग प्रति उपलब्ध नहीं होना था। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि किसी एक दस्तावेज की अलग प्रति नहीं होने के कारण अन्य सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज महत्वपूर्ण तथ्यों को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

कोर्ट के अनुसार, यदि सरकारी अस्पताल के दस्तावेजों में एंटीजन जांच पॉजिटिव आने और कोविड से मौत होने की पुष्टि मौजूद है, तो इन रिकॉर्ड का उचित मूल्यांकन किया जाना चाहिए। केवल आरटी-पीसीआर रिपोर्ट की अलग प्रति उपलब्ध नहीं होने के आधार पर मुआवजे का दावा खारिज करना उचित नहीं है।

जिलाधिकारी का आदेश हाईकोर्ट ने किया रद्द

इस मामले में सोनभद्र के जिलाधिकारी ने मृतक के परिवार को मुआवजा देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी के महत्व पर जोर दिया और मुआवजा देने से इनकार करने वाले आदेश को रद्द कर दिया।

अदालत ने मृतक की पत्नी को 50 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता देने का निर्देश दिया। इसके लिए आठ सप्ताह के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने की समयसीमा तय की गई है।

कोविड पीड़ित परिवारों के मुआवजे से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला

कोविड-19 महामारी के दौरान कई परिवारों ने अपने परिजनों को खोया था। ऐसे मामलों में अनुग्रह सहायता पाने के लिए संबंधित दस्तावेज और सरकारी रिकॉर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हाईकोर्ट के इस फैसले में स्पष्ट किया गया है कि मुआवजे के दावे पर विचार करते समय उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड को समग्र रूप से देखना जरूरी है।

यह फैसला उन मामलों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनमें कोविड से मौत की पुष्टि सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड में मौजूद है, लेकिन किसी विशेष जांच रिपोर्ट की अलग प्रति उपलब्ध नहीं है। अदालत के निर्देश के अनुसार, संबंधित मामले में मृतक की पत्नी को 50 लाख रुपये की सहायता राशि आठ सप्ताह के भीतर दी जानी है।

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