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सीएम योगी ने वंदे मातरम् का सम्मान पर उठाया मुद्दा, कहा राष्ट्रगीत का अपमान संविधान की अवहेलना

सीएम योगी ने वंदे मातरम् का सम्मान पर उठाया मुद्दा, कहा राष्ट्रगीत का अपमान संविधान की अवहेलना

उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान विधान परिषद् में योगी आदित्यनाथ ने वंदे मातरम् के सम्मान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। 16 फरवरी 2026, सोमवार को अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् भारत के आन-बान-शान का प्रतीक है और इसे अपमानित करना केवल भावनात्मक चोट नहीं बल्कि संविधान की अवहेलना के समान है।

सीएम योगी ने कहा, “वंदे मातरम् हमारे देश की पहचान और सम्मान का प्रतीक है। इसे नकारना या अपमानित करना किसी भी नागरिक या राजनीतिक दल के लिए स्वीकार्य नहीं है। राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान संविधान द्वारा सुनिश्चित हमारे कर्तव्य का हिस्सा है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर वंदे मातरम् का अपमान नहीं होने दिया जाएगा।

इस बयान के माध्यम से सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार भावनात्मक और संवैधानिक दृष्टिकोण से वंदे मातरम् की गरिमा बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका कहना था कि यह सिर्फ प्रतीकात्मक मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्रीय गौरव और संविधान की रक्षा का मामला है।

विशेषज्ञों का कहना है कि वंदे मातरम् और राष्ट्रगीत जैसे प्रतीकों का सम्मान भारतीय नागरिकों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के सार्वजनिक बयान समाज में जागरूकता बढ़ाने और भावनात्मक एकजुटता कायम करने में मदद करते हैं।

उत्तर प्रदेश में राजनीतिक पटल पर यह बयान खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्ष और समर्थक दोनों ही पक्षों ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएँ दी हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सीएम के इस बयान का उद्देश्य राज्य के नागरिकों को राष्ट्रप्रेम और संवैधानिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूक करना है।

सीएम योगी ने आगे कहा कि विद्यालयों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् का सम्मान सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी कार्यक्रम या आयोजन में राष्ट्रगीत का अपमान न हो, और अगर ऐसा कोई मामला सामने आता है तो तुरंत कार्रवाई की जाए।

राजनीतिक और सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उत्तर प्रदेश सरकार की सांस्कृतिक और संवैधानिक नीतियों को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इससे न केवल नागरिकों में राष्ट्रप्रेम की भावना बढ़ेगी बल्कि संविधान और कानून के प्रति जागरूकता भी मजबूत होगी।

विधान परिषद में इस चर्चा के बाद राजनीतिक हलकों में वंदे मातरम् और राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर बहस तेज हो गई है। कई सामाजिक संगठन और नागरिक समूह भी इस पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं और सार्वजनिक कार्यक्रमों में इस सम्मान को सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।

इस प्रकार सीएम योगी का यह बयान राज्य में राष्ट्रगीत और वंदे मातरम् के सम्मान के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और यह स्पष्ट करता है कि संवैधानिक प्रतीकों के अपमान को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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