उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन में विपक्ष पर कड़ा हमला बोला। सीएम ने विपक्षी दलों के आचरण को अस्वीकार्य और सदन के माहौल के लिए नुकसानदेह बताया।
सत्र में सीएम योगी ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्ष का व्यवहार अच्छा नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश की छवि अचानक खराब नहीं हुई थी, बल्कि विपक्ष के लगातार अनुचित आचरण के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई।
सीएम ने सदन में कहा, “जिस आचरण से बिटिया घबराती थी और व्यापारी डरता था, उसकी एक झलक अभिभाषण के दौरान देखने को मिली। यह सदन के लिए बेहद चिंताजनक है।” उन्होंने काव्यात्मक अंदाज में गालिब की पंक्ति का हवाला देते हुए कहा, ‘उम्र भर ये भूल करता रहा, धूल चेहरे पर थी और आइना साफ करता रहा।’ सीएम ने इस उद्धरण के माध्यम से **विपक्ष की लगातार गलत आदतों और आचरण को दर्शाया।’
सीएम के इस बयान के बाद सदन में सियासी हलचल और प्रतिक्रियाएं देखने को मिली। सपा और अन्य विपक्षी दलों ने अपने आचरण का बचाव करने की कोशिश की, लेकिन मुख्यमंत्री ने कहा कि सदन में अनुशासन और गरिमा बनाए रखना सभी दलों की जिम्मेदारी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि विधानसभा में इस तरह के बयान सियासी संदेश और नीति दोनों को स्पष्ट करने के लिए दिए जाते हैं। मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में यह भी संकेत दिया कि सरकार विकास, सुरक्षा और व्यापारिक माहौल को लेकर गंभीर है, लेकिन विपक्ष के अनुचित आचरण से जन विश्वास और कानून-व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
सदन में मौजूद कई नेताओं का कहना है कि सीएम योगी के बयान ने सदन की गरिमा और अनुशासन पर जोर दिया। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे विवादास्पद मुद्दों पर संयम बरतें और विकास कार्यों में सहयोग करें।
इस सत्र में बजट प्रस्तुत किए जाने के बाद, मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आचरण पर जोर देकर यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार सुधार और अनुशासन के साथ काम करने पर केंद्रित है।
इस प्रकार, यूपी विधानसभा में बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री योगी का विपक्ष पर हमला और सदन में अनुशासन को लेकर चेतावनी सियासी और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब यह देखना बाकी है कि विपक्ष इस पर कैसे प्रतिक्रिया देता है और आगामी सत्र में सदन का माहौल कैसा रहता है।

