राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय की कथित डायरी से उठे सवाल, वीडियो में देंखे नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका पर निशाना
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के विवाद ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की बताई जा रही कथित डायरी में दर्ज टिप्पणियों ने मामले को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। डायरी में चढ़ावा चोरी सामने आने के बाद एफआईआर दर्ज कराने में हुई देरी से लेकर मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका और मीडिया में दिए गए उनके बयानों तक पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, डायरी में दर्ज टिप्पणियों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
चुनाव के दौरान विवाद बढ़ने की आशंका
कथित डायरी के मुताबिक, चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के तुरंत बाद एफआईआर दर्ज नहीं कराने के पीछे चंपत राय ने एक वजह जांच के लंबा खिंचने की आशंका को बताया। उनके अनुसार, यदि तत्काल कानूनी कार्रवाई शुरू होती तो मामला लंबे समय तक चल सकता था और इसका असर आगामी विधानसभा चुनाव पर पड़ने की आशंका थी। इस मुद्दे को लेकर पहले भी एफआईआर में देरी पर सवाल उठ चुके हैं।
नृपेंद्र मिश्रा के 14 इंटरव्यू पर सवाल
डायरी में मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के मीडिया इंटरव्यू को लेकर भी तीखी टिप्पणियां होने का दावा किया गया है। चंपत राय ने सवाल उठाया कि एक अनुभवी व्यक्ति ने कथित तौर पर चार दिनों के भीतर 14 मीडिया चैनलों से बातचीत क्यों की और ऐसा किसके इशारे पर हुआ।
डायरी में यह भी लिखा बताया गया है कि नृपेंद्र मिश्रा ने एक मीडिया चैनल को दिए इंटरव्यू में चढ़ावा चोरी को 'डकैती' बताया। चंपत राय के मुताबिक, इस तरह के बयान से समाज में गलत संदेश गया। उन्होंने एक संत के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए लिखा कि संत ने नृपेंद्र मिश्रा को 'खलनायक' तक कहा था।
छह साल की बैठकों को लेकर भी सवाल
चंपत राय की कथित डायरी में यह सवाल भी उठाया गया है कि पिछले करीब छह वर्षों में मंदिर निर्माण समिति की बैठकों के दौरान व्यवस्थाओं और हिसाब-किताब जैसे मुद्दों पर कथित तौर पर चर्चा नहीं हुई, तो अब इन्हीं विषयों पर सार्वजनिक रूप से बोलने का अधिकार किस आधार पर है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर ट्रस्ट और उससे जुड़े पदाधिकारियों की भूमिका पर लगातार चर्चा हो रही है। जून में इस मामले में पुलिस एफआईआर भी दर्ज हुई थी, जिसमें मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती के दौरान चोरी, गबन और हेराफेरी के आरोपों का उल्लेख किया गया था।
'असली भेदिया कौन है?'
कथित डायरी का सबसे गंभीर सवाल मंदिर से जुड़ी गोपनीय जानकारी के बाहर पहुंचने को लेकर है। चंपत राय ने कथित तौर पर पूछा है कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव तक यह जानकारी किस माध्यम से और किसने पहुंचाई। इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि 'असली भेदिया कौन है?' और कहा कि इसका पता लगाया जाना जरूरी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने राम मंदिर ट्रस्ट की आंतरिक व्यवस्थाओं, जिम्मेदारियों और निर्णय प्रक्रिया को लेकर बहस तेज कर दी है। दूसरी ओर, नृपेंद्र मिश्रा पहले चंपत राय से जुड़े आरोपों और सामने आ रही चर्चाओं को विवाद पैदा करने की कोशिश बताते हुए लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील कर चुके हैं। फिलहाल कथित डायरी में लिखी गई बातों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में इन टिप्पणियों को अंतिम तथ्य के बजाय चंपत राय से जुड़ी कथित निजी टिप्पणियों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। मामले की जांच और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों से ही सामने आए सवालों की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

