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राम मंदिर चढ़ावा चोरी की SIT रिपोर्ट में चंपत राय और गोविंद देव गिरी का नाम नहीं, 8 आरोपी पहले ही जेल में

राम मंदिर चढ़ावा चोरी की SIT रिपोर्ट में चंपत राय और गोविंद देव गिरी का नाम नहीं, 8 आरोपी पहले ही जेल में

राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित चोरी के मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी के नाम आरोपी के तौर पर शामिल नहीं किए गए हैं। मामले में पहले से गिरफ्तार 8 आरोपी जेल में हैं।

SIT की जांच पूरी होने के बाद अब सरकार स्तर पर रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है। जांच में सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

आठ आरोपी पहले ही जेल में

मामले में पुलिस की ओर से पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है। जांच के दौरान आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था और वे फिलहाल जेल में हैं। SIT ने मामले से जुड़े दस्तावेजों, आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार की।

जांच टीम ने यह भी देखा कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे और दान की रकम से जुड़ी व्यवस्थाओं में किसी स्तर पर अनियमितता हुई थी या नहीं।

चंपत राय और गोविंद देव गिरी के नाम नहीं

मामले को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों के नाम को लेकर थी। अब SIT की अंतिम रिपोर्ट में चंपत राय और गोविंद देव गिरी को आरोपी नहीं बनाया गया है।

जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद अब संबंधित अधिकारियों के स्तर पर इसका परीक्षण किया जाएगा। रिपोर्ट में जिन लोगों की भूमिका सामने आई है, उनके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।

आरोपों और साक्ष्यों की हुई जांच

SIT ने जांच के दौरान मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ करने के साथ उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना था कि मंदिर में चढ़ावे और दान की व्यवस्था में किस स्तर पर कथित गड़बड़ी हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद अब इस मामले में अगला कदम सरकार और संबंधित जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।

फिलहाल आठ आरोपी जेल में हैं और SIT की जांच पूरी हो चुकी है। रिपोर्ट के आधार पर आगे होने वाली कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि मामले में आरोपियों के खिलाफ अभियोजन किस तरह आगे बढ़ता है।

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